Raag Ratlami Bankruptcy : हवाओं मे तैर रही है जालीदार गोल टोपी वाले बडे व्यवसायी के दिवालिया होने की खबरें,बाजार में हाहाकार
-तुषार कोठारी
रतलाम। इन दिनों रमजान का महीना चल रहा है और जालीदार गोल टोपी वाले भाईजान लोग रोजदारी में जुटे है। इसी महीने में इसी समुदाय के एक बडे व्यापारी का दिवाला निकलने की खबरें बाजार में तैर रही है। कहते है कि सात सौ से आठ सौ करोड का बकाया डूबने वाला है। बैैंकों से लगाकर हुण्डी दलालों तक हर कोई हैरान परेशान है। दिवाले की इन खबरों से बाजार में हाहाकार सा मचा हुआ है।
जानकारों का कहना है कि खनन के मामले में पूरे इलाके में नम्बर एक की हैसियत रखने वाले भाईजान ने चार प्रमुख बैैंकों से ही करीब ढाई सौ करोड रुपए का कर्ज उठाया हुआ था। बैैंक के मैनेजरों ने भाईजान की हैसियत का रौब खाकर बिना असलियत जाने खुले हाथों से लोन दे दिया था। लेकिन भाईजान की आर्थिक हालत डांवाडोल होने की जानकारी सामने आते ही मैनेजरों के होश उड गए।
बताते है कि भाईजान ने एक बैैंक से कर्जा लेकर डेढ दो करोड की लक्जरी गाडी खरीदी थी,लेकिन गाडी की पहली किश्त ही बकाया हो गई। इसके बाद धीरे धीरे राज फाश होने लगा कि भाईजान का मामला बिगड गया है। गाडी पटरी से उतर गई है और पार्टी फेल होने वाली है।
बाजार पर नजर रखने वालों का कहना है कि भाईजान को करीब नब्बे करोड का लोन देने वाली प्रमुख बैैंक के चार अफसरों पर तो बाकायदा गाज गिर भी चुकी है। इन अफसरों का डिमोशन कर दिया गया है और इन्हे ट्रांसफर करके इनके खिलाफ जांच चालू कर दी गई है। बताते है कि पिछले दिनों बाईजान भ्रष्टाचार के एक मामले में फरारी काट रहे थे और बैैंक के मैनेजरों ने फरारी के दौरान भी भाईजान को लोन दे दिया था।
जानकारों के मुताबिक भाईजान ने चार सरकारी बैैंकों से ही कुल करीब ढाई सौ करोड का कर्ज उठाया हुआ है। इसके अलावा एक बिजनेस ग्र्रुप से करीब सौ करोड और तीन चार प्राईवेट बैैंकों से करीब सौ करोड का कर्जा लिया हुआ है। सरकारी और प्राइवेट बैैंकों के अलावा भाईजान ने हुण्डी दलालों के जरिये भी मोटी रकम उधार ली हुई है।
भाईजान के दिवाले की खबरों से जहां बैैंक वाले घबराए हुए हैैं वहीं हुण्डी दलालों के जरिए भाईजान को कर्ज देने वाले व्यापारियों की हालत और भी ज्यादा खस्ता हो गई है। बैैंकों से लिया गया कर्जा तो एक नम्बर वाला होता है,लेकिन आमतौर पर हुण्डी के जरिये जो कर्जा लिया दिया जाता है,वह बी का होता है। बी वाले रुपए डूबने पर व्यापारी इसकी शिकायत भी नहीं कर सकते। शिकायत करते ही खुद की चोरी पकडाने का डर जो होता है।
भाईजान की हालत अचानक खस्ता कैसे हो गई? इस सवाल को लेकर कई तरह के जवाब सामने आ रहे है। किसी का कहना है कि भाईजान यहां के खनन माफिया थे, पत्थर गिïट्टी की खदानो पर उनका राज चला करता था। लेकिन उन्होने दूसरी जगहों और दूसरे राज्यों में जाकर अपना कामकाज फैलाने की कोशिशें की थी,लेकिन ये कोशिशें पूरी तरह नाकामयाब हो गई और भाईजान का रुपया इन कोशिशों में जाया हो गया। इसी का नतीजा है कि अब भाईजान का दिवाला निकलने की बातें हो रही है। वरना कुछ सालों पहले जब भाईजान के घर में शादी का फंक्शन हुआ था,तो पूरा शहर बुलाया गया था और लोग महीनों तक इस शादी की शानौ शौकत की बातें करते रहे थे। लेकिन वक्त वक्त की बात है। अब शानो शौकत की जगह दिवाला निकलने की बातें हो रही है। भाईजान का महलनुमा मकान भी बिकने की नौबत आ चुकी है। खबरें फिजाओं में तैर रही है अब आगे आगे देखिए होता है क्या?
बडे दिनों में दिखी पंजा पार्टी
कहने को तो पंजा पार्टी सूबे की प्रमुख विपक्षी पार्टी है,लेकिन जिस तरह विपक्ष को सडक़ों पर दिखाई देना चाहिए वैसे पंजा पार्टी आमतौर दिखाई नहीं देती थी। लेकिन बीता हफ्ता इस मायने में कुछ अलग रहा। लम्बे समय के बाद पंजा पार्टी सडक़ों पर दिखाई दी। इन्दौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद पंजा पार्टी ने इस मामले को जोर शोर से उठाया और इसी चक्कर में सत्ता पक्ष और विपक्ष में जमकर तूतू मैमै भी हुई थी। इसी बात को लेकर पंजा पार्टी वालों ने इन्दौरी मंत्री जी का पुतला जलाने का प्रोग्र्राम बना लिया।
पंजा पार्टी वाले तब पुतला लेकर जलाने पंहुचे,तो वर्दी वाले उन्हे रोकने के लिए तैयार थे। पुतले को आग लगाई गई तो वर्दी वालों ने पानी की बौछारों से पुतले की आग को बुझा दिया। इसके बाद पंजा पार्टी वालों ने जमकर नारेबाजी की। कुल मिलाकर लम्बे अरसे बाद लगा कि पंजा पार्टी अपना विपक्षी पार्टी वाला रोल निभा रही है। वैसे विपक्ष के लिए मुद्दों की कोई कमी नहीं है। ढेरों मुद्दे बिखरे पडे हैैं,लेकिन पंजा पार्टी इन मुद्दों को ठीक से उठा ही नही पाती है।
शहर में पेयजल की नई पाइप लाइन डाली जा चुकी है,लेकिन अब तक पेयजल वितरण का समय निश्चित नहीं हो पाया है। जनता परेशान है,लेकिन पंजा पार्टी के नेताओं को इस तरह के मुद्दों से कोई लेना देना ही नहीं है। शहर के कई सारे मुद्दे ऐसे है,जिन पर अगर पंजा पार्टी आन्दोलन करें तो आम लोगों का जुडाव पंजा पार्टी से हो सकता है। पुतला दहन वाला एपिसोड देखने के बाद हल्की सी उम्मीद जगी है कि आने वाले दिनों में शायद पंजा पार्टी आम लोगों के मुद्दे उठाने लगेगी। देखिए आगे क्या होता है?
पानी की टंकी और वर्दी वालों का डर
जिले की पिपलौदा तहसील के एक गांव की पानी की टंकी तब चर्चाओं में आ गई जब इस टंकी पर फांसी का फन्दा लगाकर एक आदमी ने अपनी जान दे दी। इतना ही नहीं मरने वाले ने टंकी पर गांव के सरपंच का नाम भी लिखा और अपनी जेब में उन सभी लोगों के नाम लिखे जिनकी वजह से उसने अपनी जान दे दी। मरने वाले ने अपनी आखरी चिट्ठी में कुछ वर्दी वालों का भी जिक्र किया है। उसने लिखा कि वर्दी वालों ने उसे बेवजह पीटा और अपमानित किया।
वर्दी वालों के लिए पानी की ये टंकी डर का कारण बन चुकी है। मरने वाले के परिवारवालों ने अपना प्रदर्शन तभी समाप्त किया,जब बडे अफसरों ने मामले की पूरी जांच कराने का भरोसा दिलाया। अब अगर मामले की सही से जांच हो गई,तो उन वर्दी वालों के कारनामे भी सामने आएंगे जिन्होने एक बेकसूर आदमी को मरने पर मजबूर कर दिया। कारनामें सामने आएंगे तो मामला सजा तक भी पंहुचेगा। वर्दी वालों की बदतमीजी और दुव्र्यवहार अक्सर खबरों में रहता है। बडे अफसर कहने को तो इन बातों को रोकने की बात कहते है,लेकिन असल में वर्दी वालों की पहचान उनकी बदतमीजी और दुव्र्यवहार से ही होती है। जरुरत इस बात की है कि बदलते वक्त के साथ वर्दी वालों को अपने व्यवहार में सुधार लाना चाहिए जिससे कि उनकी छबि सुधर सके।