लोन न चुकाना पड़ा भारी: चेक बाउंस मामले में प्रोपराइटर को 6 माह की जेल, कोर्ट ने जारी किया वारंट
रतलाम,19अगस्त (इ खबर टुडे): बैंक या फाइनेंस कंपनी से लोन लेकर राशि न लौटाना और चेक बाउंस करना एक व्यक्ति को भारी पड़ गया। जिला एवं अपर सत्र न्यायालय रतलाम ने प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत द्वारा दी गई 6 माह की सजा को बरकरार रखते हुए आरोपी की अपील खारिज कर दी है। न्यायालय ने आरोपी को जेल भेजने के आदेश देते हुए उसके खिलाफ वारंट जारी किया है।
जानकारी के अनुसार ग्राम उमरन निवासी और 'जय माँ आशापुरा' के प्रोपराइटर हर्षवर्धन सिंह चौहान (पिता शिव कुमार सिंह) ने श्रीराम फाइनेंस लिमिटेड की रतलाम शाखा से वाहन ऋण लिया था। किस्तों का भुगतान न करने पर जब कंपनी ने बकाया राशि की मांग की, तो आरोपी द्वारा दिया गया चेक बाउंस हो गया। इसके बाद कंपनी के अधिकारियों (रीजनल कलेक्शन हेड संजय पंड्या, कलेक्शन मैनेजर नेपाल सिंह डोडिया और शाखा प्रबंधक कृष्ण कुमार विश्वकर्मा) ने न्यायालय में परिवाद दायर किया था।
पूर्व में प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी (श्रीमती आकांक्षा) की अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 6 माह का साधारण कारावास, 9% वार्षिक ब्याज दर के साथ 1,44,225 रुपये श्रीराम फाइनेंस को अदा करने का आदेश और राशि जमा न करने पर 3 माह का अतिरिक्त कारावास का आदेश दिया।
निचली अदालत के फैसले के खिलाफ आरोपी ने जिला एवं अपर सत्र न्यायालय में अपील की थी। मामले की सुनवाई करते हुए माननीय न्यायाधीश संजीव कटारे ने निचली अदालत की सजा को बरकरार रखा और अपील खारिज कर दी। आरोपी के न्यायालय में उपस्थित न होने पर उसके खिलाफ जेल का वारंट जारी किया गया।
मामले में श्रीराम फाइनेंस लिमिटेड की ओर से पैनल अधिवक्ता हेमराज कसेडिया, अधिवक्ता भरत गिरि और अधिवक्ता यशपाल कुमार ने पक्ष रखा। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला लोन डिफॉल्ट करने और चेक बाउंस कराने वालों के लिए एक कड़ा संदेश है।