Raag Ratlami Petrol Crisis : पैट्रोल संकट की अफवाहें फैलाने वालोंं को कोस रहे हैं लोग / फ्राड के शिकार लोगों को वर्दी वालों ने लौटाए लाखों रुपए
-तुषार कोठारी
रतलाम। इरान,अमेरिका और इजराईल की जंग हुई,तो कई सारे लोगों की बांछें खिल गई थी। उन्हे लगा था कि अब मुल्क में पैट्रोल डीजल और गैस की तंगी हो जाएगी। लोगों में हाहाकार मचेगा,अफरा तफरी मच जाएगी और इन सारी बातों का ठीकरा फूल छाप पार्टी की सरकार पर फोड दिया जाएगा। लेकिन जंग शुरु होने के दो ढाई हफ्ते गुजर जाने के बाद भी जब ऐसा कुछ नहीं हुआ,तो फिर अफवाहों के जरिये हाहाकार मचाने की कोशिशें शुरु हुई। फूल छाप वालों का कहना था कि पंजा पार्टी और दूसरी पार्टियां जानबूझ कर अफवाहें फैला रही है,लेकिन पंजा पार्टी वाले इसे मानने को तैयार नहीं थे।
यह कहानी कई सारें शहरों की है। जब कई सारे शहरों में अफवाहे फैला कर अफरा तफरी मचाने की कोशिशें की गई तो भला रतलाम इसमें पीछे क्यों रहता? रतलाम में भी अचानक से रसोई गैस की मारामारी शुरु हो गई। गैस एजेंसियों पर लोगों की भीड लगने लग गई और एजेंसी वालों को अपनी दुकानें बन्द करके भागना पडा। कमाल ये था कि तमाम गैस एजेंिसयों के गोदामों में गैस सिलैण्डर भरपूर मात्रा में रखे हुए थे। लेकिन इसके बावजूद भी अफवाहों के असर में बवाल करने की कोशिशें हुई। जिला इंतजामियां ने फौरन इस पर अंकुश लगाने की कोशिशें की और दो दिन की मारामारी के बाद सबकुछ ठीक हो गया।
लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई। इसके दो तीन दिन बाद अचानक से पैट्रोल पंपों पर भीड लगने लगी। जिसे देखिए गाडी में पैट्रोल फुल कराने के लिए पैट्रोल पंप के सामने खडा नजर आ रहा था। इन अफवाहों को फैलाने में पंजा पार्टी का अहम रोल था,इसका सबूत भी इसी दौरान मिला। शहर में पंजा पार्टी के एक पुराने नेताजी ने इस मौके को फौरन भुनाने का काम किया। उन्होने एक पैट्रोल पंप पर खडे होकर सीधे फेसबुक लाइव कर डाला और फूल छाप की सरकार को जम कर कोसा। नेता जी ने अपने फेसबुक लाइव में साफ कहा कि पूरे देश भर में पैट्रोल पंपों पर भीड लगी हुई है। लोगों को पैट्रोल नहीं मिल रहा है। सरकार की लापरवाही के कारण हर आदमी को लाइन में खडा होना पड रहा है।शहर के तमाम पैट्रोल पंपो पर दिन भर भारी भीड लगी रही और शाम होते होते पैट्रोल पम्पों का पैट्रोल डीजल खत्म हो गया और उन्हे पंप बन्द करना पड गया।
कमाल ये था कि जिस दिन ये सब कुछ हो रहा था,उस दिन जिले के पैट्रोल पम्पों पर 13 लाख लीटर से ज्यादा पैट्रोल मौजूद था और पैट्रोल डीजल की कोई कमी नहीं थी। लेकिन पंप वालों की परेशानी ये थी कि पचास रु. का पैट्रोल डलवाने वाला बन्दा भी उस दिन हजार रु. का पैट्रोल डलवा रहा था। शाम को जिला इंतजामिया ने फिर से मामले को ठीक करने की कोशिश शुरु की। लोगों को बताया गया कि पैट्रोल की कोई कमी नहीं है। पंप वालों से कहा गया कि वेे अपने स्टाक की जानकारी पंप के बाहर प्रदर्शित करें ताकि लोगों को पता चल सके कि पैट्रोल उपलब्ध है।
कुल मिलाकर दो दिन की मारामारी के बाद अब तमाम पैट्रोल पंप खाली पडे है। कहीं कोई लाइन नहीं है। पैट्रोल डीजल की कोई कमी नहीं है। रसोई गैस भी आसानी से घरों तक पंहुच रही है। पहले दो दिन गैस के लिए और बाद में दो दिन पैट्रोल के लिए घण्टों लाइन में खडे रहे लोग अब उन लोगों को कोस रहे है,जिन्होने अफवाहें फैला कर उन्हे बेवजह लाइन में लगवाया था। इनमें वो लोग भी शामिल है,जिन्होने घबराहट में महंगे दामों में बिजली के इण्डेक्शन खरीद लिए थे। चार दिनों का हाहाकार मचवाने के जिम्मेदार लोगों को लोग अब ढूंढ ढूंढ कर कोस रहे है और खरी खोटी सुना रहे है।
वर्दी वालों ने फ्राड के शिकार लोगो को लौटाए लाखों रुपए
बीता हफ्ता वर्दी वालों के लिए बेहद अच्छा साबित हुआ। वर्दी वालों के लिए अच्छे साबित हुए इस हफ्ते में आम लोगों को भी काफी खुशी हासिल हुई। पहले के जमाने में आमतौर पर ऐसा नहीं होता था,लेकिन बदलती दुनिया में अब ऐसा होने लगा है कि वर्दी वाले परेशान लोगों को खुद बुलाकर उनकी परेशानियां दूर कर रहे हैैं।
कुछ सालों पहले जब किसी का मोबाइल खो जाता था,तो वर्दी वाले उसकी रिपोर्ट करना तो दूर लिखित शिकायत लेने में भी आनाकानी करते थे और भारी मशक्कत के बाद किसी व्यक्ति की लिखित शिकायत ली जाती थी। लेकिन अब बदलाव देखिए। बीते हफ्ते में वर्दी वालों ने चोरी किए गए और गुम हो चुके करीब सौ मोबाइल फोन उनके मालिकों को लौटा दिए। इनमें से कई तो ऐसे थे,जिन्होने इसकी शिकायत भी दर्ज नहीं कराई थी। वर्दी वालों ने करीब 20 लाख रु. कीमत वाले मोबाइल जब इनके मालिकों को लौटाए,तो इन लोगों को यकीन ही नहीं हुआ कि ऐसा भी होता है।
इसी तरह दूसरा कमाल ये था कि सायबर फ्राड का शिकार हुए कई सारें लोगों को भी उनकी मेहनत की कमाई के लाखों रुपए वापस दिलवाए गए। वर्दी वालों के सायबर सेल ने एक लाख रु. से ज्यादा के सायबर फ्राड के 16 मामलों में करीब 50 लाख रु.फ्रीज करवा दिए और इतना ही नहीं इनमें से करीब साढे उन्नीस लाख रु.फ्राड के शिकार लोगों के बैैंक खातों में फिर से जमा भी करवा दिए गए।
असल में वर्दी वालों के कप्तान की अगुवाई में सायबर फ्राड को रोकने के लिए विशेष अभियान चालू किया गया है और इसी अभियान के तहत लोगों को मोबाइल फोन और उनके रुपए वापस लौटाए गए है। वर्दी वालों की मेहनत से जिन लोगों को अपनी रकम और मोबाइल वगैरह वापस मिले है,वे तो खुश है ही,उनके अलावा आम लोगों को भी उम्मीद बन्धी है कि अगर कभी वे शिकार बन गए तो वर्दी वालों की मदद से वे बच भी जाएंगे।