डोसी गांव फ्लैट बेदखली मामला- महापौर प्रह्लाद पटेल का पलटवार:सकलेचा पर दर्ज हो आपराधिक प्रकरण
रतलाम, 06 अगस्त (इ खबर टुडे)। डोसी गांव स्थित प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत निर्मित शासकीय फ्लैट्स को खाली कराने की कार्रवाई के दौरान हुए विवाद ने राजनीतिक रूप ले लिया है। कांग्रेस नेताओ की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद महापौर प्रहलाद पटेल ने प्रेस वार्ता आयोजित कर कांग्रेस पर पलटवार किया है। महापौर श्री पटेल ने कहा कि कांग्रेस नेता पारस सकलेचा के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने का आपराधिक प्रकरण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि डोसी गांव के हितग्राहियो को कई अवसर दिए गए और निगम ने करोडो रूपये का नुकसान भी झेला है।
निगम सभागृह में आयोजित प्रेस वार्ता में महापौर ने बताया कि डोसी स्थित ये फ्लैट्स प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 की Affordable Housing in Partnership (AHP) योजना के तहत वर्ष 2019-20 में बनाए गए थे। योजना के अंतर्गत कुल 396 ईडब्ल्यूएस (1 बीएचके) आवास निर्मित किए गए थे। प्रत्येक आवास की कुल लागत 7.85 लाख रुपये निर्धारित की गई थी, जिसमें 1.50 लाख रुपये केंद्रांश, 1.50 लाख रुपये राज्यांश, 2.85 लाख रुपये निगम अंशदान तथा 2 लाख रुपये हितग्राही अंशदान शामिल था।
महापौर ने बताया कि शिवशक्ति कॉलोनी और प्रकाश नगर स्लम बस्तियों के पात्र निवासियों का सर्वे कर सूची तैयार की गई थी तथा तत्कालीन कलेक्टर की स्वीकृति के बाद 396 हितग्राहियों का चयन किया गया। वर्ष 2020-21 में रेलवे प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू होने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिसके बाद प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में चयनित हितग्राहियों को डोसी स्थित आवासों में स्थानांतरित किया गया।
स्थानांतरण के समय प्रत्येक हितग्राही से निर्धारित अंशदान के रूप में केवल 20 हजार रुपये** जमा कराए गए थे। इसमें 10 हजार रुपये विधायक निधि से अनुग्रह स्वरूप उपलब्ध कराए गए थे, जबकि शेष राशि हितग्राहियों द्वारा जमा की जानी थी। इसके बाद लगभग 1.80 लाख रुपये की शेष राशि बैंक ऋण के माध्यम से जमा कराने की व्यवस्था की गई थी।
महापौर ने दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया कि 396 हितग्राहियों में से केवल 166 ने बैंक ऋण प्राप्त किया, 20 हितग्राहियों ने पूरी राशि एकमुश्त जमा की, जबकि 208 हितग्राहियों ने आज तक न तो बैंक ऋण लिया और न ही अपना निर्धारित अंशदान जमा कराया। इनमें से अधिकांश हितग्राहियों द्वारा ऋण की किस्तें समय पर जमा नहीं करने के कारण उनके खाते एनपीए (Non-Performing Asset) घोषित हो गए, जिससे शेष मामलों में भी बैंक ऋण स्वीकृति प्रभावित हुई।
उन्होंने कहा कि ये 208 हितग्राही पिछले लगभग छह वर्षों से बिना निर्धारित अंशदान जमा किए आवासों पर अवैध रूप से कब्जा किए हुए थे। वर्ष 2021 में तत्कालीन आयुक्त द्वारा अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए अपर कलेक्टर को पत्र भेजा गया था। इसके बाद नगर निगम ने समय-समय पर 04 नवंबर 2021, 10 मार्च 2022, 30 दिसंबर 2023, 03 अक्टूबर 2024, 06 अगस्त 2026 और 29 जुलाई 2026 को नोटिस जारी कर बकाया राशि जमा करने या आवास रिक्त करने के निर्देश दिए, लेकिन संबंधित लोगों ने किसी भी नोटिस का पालन नहीं किया।
महापौर ने यह भी बताया कि ईडब्ल्यूएस आवासों को सब्सिडी देने के उद्देश्य से परिसर में 240 एलआईजी फ्लैट्स** भी बनाए गए थे, लेकिन खाली पड़े फ्लैट्स में लगातार बिजली के तारों की चोरी, लिफ्टों में चोरी, फायर हाइड्रेंट सामग्री, प्लंबिंग एवं सैनिटरी सामान तथा भवन के कांच और गेट की चोरी जैसी घटनाएं होती रहीं। 11 जून 2026 को पुलिस ने कुछ आरोपियों को पकड़कर एफआईआर क्रमांक 0545 दर्ज की थी।
निगम के अनुसार संबंधित लोगों द्वारा अवैध रूप से बिजली और पानी की सुविधाओं का उपयोग भी किया जा रहा था, जिससे नगर निगम को पिछले छह वर्षों में **प्रतिमाह लगभग 7 से 10 लाख रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ। अवैध कनेक्शन काटे जाने के बाद भी अनधिकृत तरीके से पुनः विद्युत उपयोग किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं।
महापौर ने बताया कि 31 जुलाई 2026 को निगम द्वारा छठी बार नोटिस तामील कर वैधानिक कार्रवाई की गई। कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों द्वारा निगम अमले का विरोध किया गया तथा पथराव, मारपीट, लाठियों से हमला और शासकीय वाहनों में तोड़फोड़ जैसी घटनाएं हुईं। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा पुनर्वास योजना के तहत विधिवत आवास उपलब्ध कराने के बावजूद बिना अंशदान जमा किए आवास, जल और विद्युत सुविधाओं का निःशुल्क उपयोग करने की मांग योजना के प्रावधानों और वित्तीय अनुशासन के विपरीत है।
महापौर प्रहलाद पटेल ने कहा कि नगर निगम की सख्ती के बाद 23 लोगों ने एकमुश्त बकाया राशि जमा कर दी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन परिवारों से फ्लैट खाली कराए गए हैं, उन्हें पूरी तरह बेघर नहीं छोड़ा गया है। निगम के रैन बसेरों और अन्य स्थानों पर उनके अस्थायी ठहरने की व्यवस्था की गई है।
प्रेस वार्ता के अंत में महापौर ने कहा कि नगर निगम ने संबंधित हितग्राहियों को बेदखली से बचाने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन अब शासन स्तर से फ्लैट खाली कराने के स्पष्ट निर्देश प्राप्त हो चुके हैं। फिर भी यदि कोई हितग्राही बकाया राशि जमा कर नियमितीकरण कराना चाहता है, तो उसे नियमानुसार अवसर देने पर विचार किया जा सकता है।