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नियमों को ठेंगा: शराब दुकानें बनीं 'मयखाना', आबकारी और पुलिस मौन

​पावर हाउस रोड पर सरेआम उड़ रही धज्जियां; अहाते बंद फिर भी दुकान और गोदामों में चल रहा 'जाम का दौर'
 

​रतलाम, 03 मई(इ खबर टुडे)। जिले में शराब दुकानों के आवंटन को एक माह से अधिक का समय बीत चुका है। शुरुआती देरी के बाद अब जिले की सभी दुकानें पूरी तरह संचालित हैं, लेकिन इन दुकानों के संचालन में नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। शहर की कई शराब दुकानें अब 'बेवड़ों का अड्डा' बन चुकी हैं, जहाँ शासन के निर्देशों को ताक पर रखकर अवैध रूप से शराब पिलाई जा रही है। ताज्जुब की बात यह है कि इस अव्यवस्था पर पुलिस और आबकारी विभाग ने आँखें मूंद ली हैं, जिससे उनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

​शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि शराब दुकानों पर बैठकर शराब पिलाना प्रतिबंधित है और पूर्व में संचालित अहातों को बंद कर दिया गया है। इसके बावजूद, पावर हाउस रोड स्थित शराब दुकान संचालक अपने निजी स्वार्थ के लिए दुकान के भीतर और पास ही स्थित शराब गोदामों में लोगों को बिठाकर शराब परोस रहे हैं। आलम यह है कि शाम होते ही यहाँ असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लग जाता है, जिससे राहगीरों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

​न क्यूआर कोड, न रेट लिस्ट: मनमानी वसूली जारी
​नियमों के मुताबिक, प्रत्येक शराब दुकान पर क्यूआर कोड और रेट लिस्ट चस्पा करना अनिवार्य है, ताकि उपभोक्ता हर ब्रांड की सही कीमत जान सके। लेकिन शहर की अधिकांश दुकानों पर संचालक इन नियमों को ठेंगा दिखा रहे हैं। क्यूआर कोड न होने का सीधा फायदा उठाकर ग्राहकों से प्रिंट रेट से अधिक वसूली की जा रही है।

​जिम्मेदारों की 'मजबूरी' या 'मजे'?
​शराब दुकानों की इस मनमानी ने पुलिस और आबकारी विभाग की भूमिका को संदिग्ध बना दिया है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि विभाग की मिलीभगत के बिना यह खेल मुमकिन नहीं है। जहाँ एक ओर नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, वहीं विभाग की सुस्ती यह दर्शाती है कि "मजे" केवल शराब संचालकों के ही नहीं, बल्कि जिम्मेदारों के भी हो रहे हैं।