मध्यप्रदेश में कहीं एक टीचर के भरोसे 51 बच्चे तो कहीं 212 पर 25 गुरुजी तैनात, खुली शिक्षा व्यवस्था की पोल
भोपाल,05 सितंबर (इ खबर टुडे )। एक तरफ कई सरकारी स्कूलों में एक ही शिक्षक के कंधों पर पढ़ाई कराने के साथ-साथ मध्याह्न भोजन प्रबंधन, यू-डाइस प्रविष्टि, समग्र आईडी पोर्टल अपडेट और बच्चों को स्कूल लाने जैसे प्रशासनिक कार्यों का बोझ है। वहीं दूसरी तरफ, दर्जनों बच्चे वाले कुछ स्कूलों में शिक्षकों का बड़ा जमावड़ा मौजूद है।
इस प्रशासनिक लापरवाही और असंतुलित पदस्थापना के कारण दर्जनों स्कूल बंद होने की कगार पर हैं या अतिथि शिक्षकों के सहारे चल रहे हैं। कई स्थानों पर जर्जर भवनों के कारण बच्चे मंदिरों के प्रांगण में या पेड़ों की छांव में बैठने को मजबूर हैं।
भोपाल के दो स्कूलों से उजागर हुई अव्यवस्था
इनायतपुर प्राथमिक स्कूल: यहां 51 विद्यार्थियों को संभालने के लिए सिर्फ एक महिला शिक्षक हैं। शिक्षक के सेवानिवृत्त होने के बाद से नई पदस्थापना नहीं हुई, जिससे पहली से पांचवीं कक्षा तक के सभी बच्चे सीलन भरे एक ही कमरे में टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं।
नूतन सुभाष स्कूल: जर्जर भवन टूटने के कारण दूसरी जगह शिफ्ट हुए इस स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या 1200 से घटकर 212 रह गई है, लेकिन यहां 25 शिक्षक तैनात हैं। इसके बावजूद जगह की कमी के कारण 5वीं से 8वीं तक के छात्र एक ही कमरे में बैठते हैं।
अन्य जिलों से बदहाली की तस्वीरें
इंदौर के महू-मानपुर मार्ग पर 'कवच संस्था' ने झुग्गी-झोपड़ी के 40 से अधिक बच्चों के लिए बांस-बल्लियों और ग्रीन नेट की मदद से एक अस्थायी पाठशाला शुरू की, जिससे प्रेरित होकर कई बच्चों ने नियमित सरकारी स्कूलों में दाखिला ले लिया है।
मुरैना के चक्कपुरा में जर्जर स्कूल भवन के कारण 50 बच्चों को 1 शिक्षक पेड़ के नीचे पढ़ाता है। बारिश होने पर स्कूल की छुट्टी करनी पड़ती है।
राजगढ़ के बड़ल्या में प्राथमिक स्कूल का भवन पिछले 5 सालों से जर्जर है। छत में छेद और शौचालय की व्यवस्था न होने के कारण 9 बच्चे खेड़ापति हनुमान मंदिर के दलान में पढ़ाई करते हैं।