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 रतलाम / आईडीबीआई बैंक में 1.21 करोड़ का गबन करने वाले कैशियर को 10 साल की जेल, 50 हजार जुर्माना

  जिला सहकारी बैंक को 70 लाख रुपये देने से मना करने पर खुली पोल
 
 गबन की राशि में से करीब 80 लाख रुपये ऑनलाइन सट्टे में हारे

 

रतलाम, 02 जुलाई (इ खबर टुडे)। स्थानीय आईडीबीआई बैंक में एक करोड़ इक्कीस लाख रुपये का गबन करने वाले तत्कालीन कैशियर सुरेश मीणा (30 वर्ष) को न्यायालय ने दस वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश राजेश नामदेव की न्यायालय ने आरोपी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। आरोपी गिरफ्तारी की तारीख 15 अगस्त 2023 से ही जेल में बंद है।

प्रकरण में पैरवी करने वाले अपर लोक अभियोजक एवं शासकीय अधिवक्ता समरथ पाटीदार ने बताया कि नाहरपुरा, किरण टॉकीज रोड स्थित आईडीबीआई बैंक के शाखा प्रबंधक किशोर कुमार तंवर ने 12 अगस्त 2023 को थाना माणक चौक में इस गबन की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

ऐसे खुली गबन की पोल
अपर लोक अभियोजक के अनुसार, आईडीबीआई बैंक में जिला सहकारी बैंक का खाता था। सहकारी बैंक को 70 लाख रुपये की नकद आवश्यकता होने पर कैशियर सुरेश मीणा ने राशि देने से टालमटोल की। शक होने पर बैंक मैनेजर ने रीजनल ऑफिस इंदौर को सूचित किया। वहां से रीजनल ऑफिसर प्रिया सिसोदिया रतलाम पहुंचीं और स्टाफ की मौजूदगी में जब कैश का भौतिक सत्यापन (मिलान) किया गया, तो सिस्टम के अनुसार 1,46,39,664 रुपये होने चाहिए थे, लेकिन मौके पर केवल 25,39,664 रुपये ही मिले। इस तरह कुल 1,21,00,000 रुपये कम पाए गए।

शाम को बैग में भरकर ले जाता था नोटों की गड्डियां
पूछताछ में आरोपी सुरेश मीणा (निवासी- ग्राम माचड़ी, जिला करौली/गंगापुर, राजस्थान) ने स्वीकार किया कि उसने बैंक के कैश काउंटर और सेफ डिपॉजिट वॉल्ट से अलग-अलग तारीखों में यह राशि निकाली थी। बैंक के सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर पुलिस को पता चला कि सुरेश बैंक का समय खत्म होने के बाद शाम को काउंटर के नीचे से नोटों की गड्डियां निकालकर अपने बैग में रखता था।

सट्टे की लत और रिश्तेदारों के खातों का इस्तेमाल
पुलिस जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। आरोपी सुरेश मीणा की मासिक सैलरी मात्र 29 हजार रुपये थी, लेकिन उसने गबन की गई राशि में से 79 लाख 79 हजार रुपये ऑनलाइन सट्टा ऐप में लगा दिए। आरोपी अपनी बहन निर्मला मीणा के एसबीआई बैंक खाते का उपयोग खुद करता था और उसमें अपना मोबाइल नंबर लिंक कर रखा था, जिससे वह फोन पे और पेटीएम के जरिए रुपयों का ट्रांसफर करता था। सुरेश ने एसबीआई की मुख्य शाखा के एटीएम में जाकर भी रुपये जमा किए। उसने रिश्तेदारों को 'जमीन बेचने' का झांसा देकर उनके खातों में लाखों रुपये ट्रांसफर किए और फिर उनसे वापस अपने खाते में मंगवा लिए।

न्यायालय ने अभियोजन के तर्कों और पुलिस द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों को सही पाते हुए आरोपी सुरेश मीणा को धारा 409 (लोक सेवक द्वारा अमानत में ख्यानत) के तहत दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के कारावास की सजा से दंडित किया।