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शिवपुरी की कृषि संस्था से आया मूंगफली बीज, सौ प्रतिशत अनुदान,सौ प्रतिशत नुकसान, 2000 हेक्टेयर का लक्ष्य कागजों में

कृषि विभाग का कारनामा,जाँच करने को तैयार नहीं अधिकारी 
 
** खेत में बोये बीज,नहीं ऊगा एक भी दाना 
** दोबारा बुवाई को  मजबूर हुए किसान 
** कृषि विभाग छुपा रहा है किसानो की लिस्ट 

 

रतलाम,27 जुलाई(इ खबर टुडे)। सरकार का 2000 हेक्टेयर मूंगफली का लक्ष्य और किसानों को "100 प्रतिशत अनुदान" का लालच, दोनों ही शिवपुरी की सिद्ध कृषि उत्पादक सहकारी संस्था के बीज की भेंट चढ़ गए। जिले में वितरित 1200 क्विंटल मूंगफली बीज में से कई क्विंटल बीज खेतों में उगा ही नहीं। 
इसमें भी सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बोरी पर अंकित पैकिंग दिनांक 12/06/2026 है। यानी बीज महज 1 महीने पहले ही पैक हुआ। नया होने के बावजूद अंकुरण नहीं होना कई प्रश्नचिन्ह लगा रहा है। इसका परिणाम यह हुआ कि सैलाना विधानसभा क्षेत्र  और रतलाम ग्रामीण के किसान कर्ज और मेहनत दोनों गंवा बैठे। उन्हें मजबूरन अपनी मूंगफली की फसल जोतकर दोबारा सोयाबीन की बोवनी करनी पड़ी।

नया बीज फिर भी फेल  क्यों ? 

कृषि विभाग द्वारा जिले में वितरित किये गए सिद्ध बीज - Siddh Seeds की बोरी पर किस्म/जाती 44-37 आधार प्रमाणित और लॉट नंबर OCT-25-12-8567 32 लिखा है।  कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नया बीज फेल होने की सबसे बड़ी वजह छिलका निकला बीज है। मुंगफली के दाने के ऊपर पहले कड़ा कवच/भूसा होता है। उसको हटाकर अंदर गुलाबी पतला छिलका वाला दाना निकलता है। यही गुलाबी छिलका दाने का सुरक्षा कवच है। तूलाई, पैकिंग और परिवहन में रगड़ लगने से ये छिलका उतर जाता है और दाने टूट-फूट जाते हैं। छिलका हटते ही हवा + नमी सीधे बीज के तेल को छूती है। ऐसा बीज पानी लगते ही सड़ जाता है। 

किसान की चीख


गंगायता पाडा शिवगढ़ के किसान सुरपाल चारेल ने बताया "कृषि विभाग से एक बैग, करीब 30 किलो मूंगफली मिली थी। पूरी जमीन में बो दी। एक भी दाना नहीं उगा। अब डबल खर्च करके दूसरी फसल बोनी पड़ रही है। फ्री का बीज महंगा पड़ गया। 

युवा नेता का आरोप , विभाग छुपा रहा है लिस्ट 

युवा नेता चंदू मईड़ा ने आरोप लगाया है कि  "क्षेत्र में जिन किसानों को विभाग ने अनुदान में मूंगफली बीज दिया था, उनके खेतों में बीज उगा ही नहीं। हम कृषि विभाग से किसानों की लिस्ट मांग रहे हैं ताकि हकीकत सामने आ सके, लेकिन विभाग वो लिस्ट भी नहीं दे रहा है।"

कृषि विभाग का "अंधा" निरीक्षण


कृषि विभाग  के शाखा प्रभारी तकनीकी सहायक हीरा लाल बर्फा का कहना है "आलोट, पिपलौदा में प्लाट बढ़िया हैं, शिकायत नहीं आई। शायद बारिश से अंकुरण नहीं हुआ।"
ग्राम विस्तार अधिकारी भी कहते हैं "खेतों में अंकुरण हुआ है, प्लाट बढ़िया हैं।" लेकिन फोटो मांगे तो जवाब "फोटो नहीं लिये, केवल देख कर आ गये थे।"
यानी न सबूत, न फोटो, न लिस्ट, न रिकॉर्ड। बस जुबानी जमा-खर्च।

किसानों की मांग: अगले साल कवच सहित बीज दो, रकबे की ज़मीनी पड़ताल करो

ज़मीनी पड़ताल: अगर विभाग का लक्ष्य 2000 हेक्टेयर में मूंगफली की बुवाई कराना था और 1200 क्विंटल बीज 100% अनुदान पर बांटा गया है, तो जिले में मूंगफली के वास्तविक रकबे की ज़मीनी पड़ताल हो। गांव-गांव टीम भेजकर GPS फोटो के साथ जांच हो। लाभार्थी लिस्ट का मिलान हो और जिनका नुकसान हुआ उन्हें मुआवजा मिले।      

बीज की किस्म बदलो

 किसानों का कहना है कि अगर विभाग वाकई जिले में मूंगफली का रकबा बढ़ाना चाहते हैं तो अगले वर्ष कवच सहित मूंगफली बीज लाया जाए। कवच/भूसे वाला बीज तूलाई, पैकिंग और परिवहन में डैमेज नहीं होता। खेत में बोने से पहले किसान खुद कवच हटाकर गुलाबी छिलके वाला दाना बोएगा तो खराब होने की संभावना कम रहती है और अंकुरण भी बेहतर होता है। छिलका निकला बीज गोदाम से खेत तक पहुंचते-पहुंचते ही बेकार हो जाता है।

किसानों का कहना है "100% अनुदान" के साथ "100% गुणवत्ता की गारंटी" और "100% पारदर्शिता" भी जरूरी है। अगर समय रहते जांच और सुधार नहीं हुआ तो जिले में मूंगफली उत्पादन का लक्ष्य सिर्फ कागजों में ही रह जाएगा।