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रतलाम पुलिस की कार्रवाई: खेत-मकानों से लहसुन चुराने वाला गिरोह बेनकाब, 3 गिरफ्तार

 
​ईको गाड़ी और 8 कट्टे लहसुन समेत ₹4.15 लाख का माल जप्त; गिरोह का एक आरोपी मंदसौर कोर्ट से चल रहा था फरार

​रतलाम, 02 अगस्त(इ खबर टुडे)। जिले में संपत्ति संबंधी अपराधों और चोरी की वारदातों पर अंकुश लगाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना नामली पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने सुनसान मकानों और खेतों को निशाना बनाकर लहसुन चोरी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से चोरी की गई लहसुन और वारदात में इस्तेमाल बिना नंबर की ईको कार जप्त की गई है, जिसकी कुल कीमत ₹4,15,400 बताई जा रही है।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार ​मामला ग्राम पलदुना का है। फरियादी प्रहलाद धाकड़ (50 वर्ष) ने 26 जुलाई 2026 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके नए मकान में रखी लहसुन की फसल की 6-7 कट्टे (बोरी) ताला तोड़कर रात के समय चोरी कर ली गई हैं। फरियादी की रिपोर्ट पर नामली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

​एसपी अमित कुमार के निर्देशन, एएसपी राकेश पान्द्रो एवं एसडीओपी किशोर पाटनवाला के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी अमित कोरी की पुलिस टीम ने घटनास्थल व आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली।

​जांच के दौरान एक संदिग्ध ईको वाहन के मूवमेंट और रूट का पता चला। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस सबसे पहले आरोपी मोहम्मद हुसैन पिता सलीम कुरेशी (40 वर्ष), बड़ावदा तक पहुँची। कड़ाई से पूछताछ में उसने जुर्म कबूल कर लिया। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने गिरोह के दो अन्य साथियों—राजू पिता कन्हैयालाल दमामी (40 वर्ष), बनवाड़ा, सरवन पिता तेजू नायक बाछड़ा (30 वर्ष), बनवाड़ा को भी धर दबोचा।

मुख्य आरोपी पर पहले से दर्ज है सजा का फरमान
पुलिस पड़ताल में सामने आया कि मुख्य आरोपी मोहम्मद हुसैन आदतन अपराधी है। मंदसौर की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा थाना भावगढ़ के वर्ष 2014 के आबकारी व चोरी के एक मामले में उसे 3 वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई जा चुकी थी, जिसमें वह काफी समय से फरार चल रहा था। पुलिस गिरोह से अन्य संभावित चोरियों के संबंध में भी पूछताछ कर रही है।

​इस सफल कार्रवाई में थाना प्रभारी कार्यवाहक निरीक्षक अमित कोरी, प्रधान आरक्षक दिलीप रावत, सुरेश चौहान, गोपाल खराड़ी तथा आरक्षक माखनसिंह व कुनाल रावत की मुख्य और सराहनीय भूमिका रही।