रतलाम: आदिवासी महिला की जमीन हड़पने के लिए जाति बदलकर किया फर्जीवाड़ा
रतलाम,05 मई (इ खबर टुडे)। जिले के ग्राम धराड़ में आदिवासी समाज की कृषि भूमि को फर्जी तरीके से सामान्य वर्ग (राजपूत) की भूमि बताकर बेचने और सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी करने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस संबंध में प्रार्थी गजेंद्र सिंह भाटी ने जिला कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपकर तत्कालीन सब-रजिस्ट्रार, पटवारी और सर्विस प्रोवाइडर सहित 6 लोगों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की है।
यह है पूरा मामला
शिकायत के अनुसार, ग्राम धराड़ में स्थित सर्वे क्रमांक 258/1/1 (रकबा 0.800 हेक्टेयर) भूमि मूल रूप से कमलाबाई (भील) और मनोहरलाल (भील) के नाम पर राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज थी। मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता की धारा 165 के तहत किसी भी आदिवासी की जमीन बिना कलेक्टर की अनुमति के गैर-आदिवासी को नहीं बेची जा सकती।
'भील' को बनाया 'राजपूत'
आरोप है कि विपक्षीगणों ने सोची-समझी साजिश के तहत एक अनपढ़ आदिवासी महिला की लाचारी का फायदा उठाया। जमीन को गैर-आदिवासियों को बेचने के लिए राजस्व रिकॉर्ड में जालसाजी कर महिला की जाति भील' के स्थान पर 'राजपूत' दर्ज कर दी गई। इसके साथ ही सह-खातेदार मनोहरलाल और उनके वारिसों का नाम रिकॉर्ड से गायब कर दिए गए ।यह सब इसलिए किया गया ताकि जमीन के विक्रय के लिए प्रशासन से अनुमति लेने की जरूरत न पड़े और जमीन को सामान्य वर्ग की भूमि बताकर आसानी से रजिस्ट्री कराई जा सके।
अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
शिकायत में सबसे चौंकाने वाला दावा तत्कालीन सब-रजिस्ट्रार गौड़चन्द्र परमार को लेकर किया गया है। आरोप है कि पहले उन्होंने खुद अपने व्हाट्सएप ग्रुप में इस जमीन के खसरे को भेजकर चेतावनी दी थी कि इसकी रजिस्ट्री न की जाए। लेकिन बाद में, उन्हीं के द्वारा 25 फरवरी 2026 को बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के इस विवादित जमीन की रजिस्ट्री (क्रमांक 01011625022026014461) कर दी गई।
शिकायतकर्ता गजेंद्र सिंह ने तत्कालीन रजिस्ट्रार गौड़चन्द्र परमार के साथ तत्कालीन पटवारी, सर्विस प्रोवाइडर/स्टाम्प वेंडर और रजिस्ट्री के दो गवाहों और जिस व्यक्ति के नाम पर रजिस्ट्री की गई है उन सभी के विरुद्ध कार्यवाही करने की मांग की है।
प्रार्थी का कहना है कि यह न केवल एक गरीब आदिवासी परिवार के साथ धोखाधड़ी है, बल्कि शासन के नियमों की भी खुली अवहेलना है। उन्होंने कलेक्टर से मांग की है कि इस पूरे सिंडिकेट के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और आपराधिक षडयंत्र के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में भू-माफिया इस तरह मासूम लोगों को शिकार न बना सकें।