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प्रदेश के निर्देशों को दरकिनार कर शहर कांग्रेस ने डालुमोदी चौराहे पर फूंका निर्वाचन आयुक्त का पुतला

​कलेक्ट्रेट का घेराव करने के थे स्पष्ट निर्देश, लेकिन शहर कांग्रेस ने चौराहे पर ही सीमित किया प्रदर्शन
 

 

 

रतलाम, 30 सितंबर (इ खबर टुडे)। ​मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी (MPCC) और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद स्थानीय शहर कांग्रेस कमेटी में गुटबाजी या दिशा-निर्देशों की अवहेलना का मामला सामने आया है। प्रदेश नेतृत्व द्वारा 30 सितंबर को सभी जिला मुख्यालयों पर कलेक्ट्रेट (कलेक्टर कार्यालय) का पूर्ण घेराव और उग्र प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपने का सख्त फरमान जारी किया गया था। हालांकि, शहर कांग्रेस ने कलेक्ट्रेट का रुख न करते हुए शहर के मुख्य व्यावसायिक केंद्र डालुमोदी चौराहे पर ही सुबह निर्वाचन आयुक्त का पुतला दहन कर अपना विरोध दर्ज कराया।  

​इस दौरान चौराहे पर शहर अध्यक्ष शांतिलाल वर्मा, महेंद्र कटारिया शैलेन्द्र अठाना, मयंक जाट, यास्मीन शैरानी, सोहेल काज़ी राजीव रावत, बसंत पंड्या, वीरेंद्र सिंह, हितेश पेमाल, पप्पू राठोड रवि वर्मा सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी, कार्यकर्ता और वरिष्ठ नेता एकत्रित हुए और केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

​प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि भोपाल में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के सफल घेराव के बाद आंदोलन को जिला स्तर पर उग्र किया जाए। इसके तहत सभी जिला मुख्यालयों पर कलेक्टर कार्यालय का घेराव कर जिला निर्वाचन अधिकारी (कलेक्टर) को ज्ञापन सौंपना था।  

​ज्ञापन की मुख्य मांगें
​अंतिम मतदाता सूची से हटाए गए 34.25 लाख मतदाताओं का विधानसभावार, जिलावार और कारण सहित पूरा ब्योरा तत्काल सार्वजनिक किया जाए। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई करने और उन्हें तुरंत पद से हटाने की मांग। मतदाता सूची में किए गए कथित अवैध बदलावों की किसी स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जाए।  


​कलेक्ट्रेट घेराव के निर्देश होने के बावजूद कार्यकर्ताओं की भीड़ डालुमोदी चौराहे पर ही सिमट कर रह गई। पुतला दहन के दौरान बड़ी संख्या में पहुंचे पार्टी के पदाधिकारियों और नेताओं ने मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला फूंका। हालांकि, प्रदेश के तय कार्यक्रम के विपरीत हुए इस प्रदर्शन से पार्टी के अंदरूनी तालमेल को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।