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 'संस्मरणों की स्वर्णिम संध्या' में अजहर हाशमी के साहित्यिक योगदान को याद कर दी पुष्पांजलि

 प्रेस क्लब भवन में विद्यार्थियों, शिक्षकों और साहित्यकारों ने साझा किए संस्मरण
 
 

रतलाम,12 जून(इ खबर टुडे)। प्रख्यात चिंतक एवं साहित्यकार प्रो. अजहर हाशमी की प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर बुधवार को प्रेस क्लब भवन में 'संस्मरणों की स्वर्णिम संध्या' का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों और साहित्यकारों ने उनके साहित्यिक एवं शैक्षणिक योगदान को याद करते हुए उन्हें संस्कारवान पीढ़ी का निर्माता, बताया। इस अवसर पर उपस्थितजनों ने प्रो. हाशमी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

कार्यक्रम का शुभारंभ महर्षि संजय शिव शंकर दवे द्वारा मंत्रोच्चारण के साथ हुआ। इसके बाद उन्होंने प्रो. हाशमी से जुड़े अपने संस्मरण साझा किए। कक्षा नौवीं के विद्यार्थी प्रारब्ध त्रिपाठी ने उनकी प्रसिद्ध कविता 'जो-जो शख्स तेरे दुख में तेरे साथ खड़ा था' का पाठ कर भावनात्मक वातावरण बना दिया। पूर्व प्राचार्य डॉ. संतोष केशव जोशी ने कॉलेज जीवन के अनुभव साझा कर कहा कि प्रो. हाशमी के साथ कार्य करना उनके लिए सौभाग्य की बात रही। उन्होंने कहा कि प्रो. हाशमी का स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति समारोह अपने आप में अद्भुत था और शहर में किसी भी प्राध्यापक को इतना सम्मान नहीं मिला जितना उन्हें मिला। 

प्रो. मनोहर जैन ने कहा कि वे उनके मार्गदर्शन में ही आगे बढे और उन्हें जब भी किसी प्रतियोगिता में सफलता मिलती, प्रो. हाशमी उन्हें पूरे कॉलेज में कक्षाओं में ले जाकर प्रोत्साहित करते थे। साहित्यकार आशीष दशोत्तर ने उनकी कविता 'मुझे राम वाला हिंदुस्तान चाहिए' का पाठ किया। डॉ. आरपी पाटीदार ने भी उनके साथ बिताए समय को स्वर्णिम बताया।

 इस अवसर पर विनोद संघवी, डॉ. अनिला कंवर, प्रदीप शर्मा, नंदिनी सक्सेना सहित अन्य वक्ताओं ने भी संस्मरण साझा किए। कार्यक्रम में गणमान्यजन व पत्रकार उपस्थित रहे। संचालन व्याख्याता श्वेता नागर ने किया। आभार विद्यार्थी परिवार अध्यक्ष सतीश त्रिपाठी ने व्यक्त किया।