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दवा विक्रेताओं की मनमानी से डूबी किसानों की पूंजी; बुवाई के 9 दिन बाद भी नहीं हुआ अंकुरण, प्रशासन को सौंपा ज्ञापन

 

 

रतलाम,07जुलाई(इ खबर टुडे)। रतलाम जिले में नकली और घटिया गुणवत्ता की कीटनाशक व बीज उपचार दवाइयों का काला कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला रतलाम शहर तहसील के ग्राम मांगरोल से सामने आया है, जहां जय किसान फर्टिलाइजर्स (धराड़) और पाटीदार कृषि सेवा केंद्र (मांगरोल) से सोयाबीन बीज उपचार कराने के बाद किसानों की करोड़ों रुपये की फसल बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गई है। ₹11,000 प्रति क्विंटल की दर से महंगा बीज खरीदने वाले किसानों के खेतों में बुवाई के 9 दिन बाद भी अंकुरण नहीं हुआ है।

​प्रशासनिक उदासीनता से आक्रोशित होकर क्षेत्र के दर्जनों किसानों ने प्रशासन को जनसुनवाई के दौरान ज्ञापन सौंपकर दोषियों पर एफआईआर दर्ज करने, प्रभावितों को मुआवजा देने और 7 दिन के भीतर कार्रवाई न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।

​लाखों की ठगी, 200 बीघा से अधिक की फसल संकट में
​ग्राम मांगरोल के पीड़ित किसान रतनलाल पाटीदार (28 बीघा), सुभाष पाटीदार (30 बीघा), प्रभुलाल पाटीदार (15 बीघा), बाबूलाल पाटीदार (15 बीघा), शंकरलाल पाटीदार (15 बीघा), ईश्वर पाटीदार (15 बीघा), देवीलाल पाटीदार (15 बीघा), ईश्वरलाल पाटीदार (12 बीघा), कन्हैयालाल पाटीदार (12 बीघा), राजेश पाटीदार (12 बीघा), वासुदेव पाटीदार (10 बीघा), मोहनलाल पाटीदार (09 बीघा), साबिर खान (07 बीघा) और मुकेश कांगरा (07 बीघा) सहित कई किसानों ने बताया कि कंपनी के कर्मचारियों ने खुद मशीन से उनके बीजों का उपचार किया था।

​महंगे दामों पर बीज खरीदने और बुवाई के 9 दिन बीत जाने के बाद भी खेतों में अंकुरण (उगाव) नहीं हुआ है। किसानों का कहना है कि दवा घटिया होने के कारण उनके बीज पूरी तरह खराब हो चुके हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक और मानसिक आघात लगा है।

​किसानों की मांगें है कि कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की टीम से मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और संबंधित दवा के बैच की बिक्री पर तुरंत रोक लगे। लापरवाही सिद्ध होने पर संबंधित कंपनी, विक्रेता और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो। पीड़ित किसानों के नुकसान का वास्तविक सर्वे कर उन्हें जल्द से जल्द उचित मुआवजा दिलाया जाए। कीटनाशक दुकानों पर केवल उन्हीं कंपनियों की दवाएं बिकें जो कृषि विभाग की सूची में पंजीकृत हैं। बिना जानकारी के दवा बेचने वाले दुकानदारों पर सीधे केस दर्ज किया जाए। पूरे जिले में नकली कृषि आदानों की दुकानों, गोदामों और फैक्ट्रियों पर विशेष अभियान चलाकर संदिग्धों के लाइसेंस निरस्त किए जाएं।

​7 दिन का अल्टीमेटम, वरना होगा आंदोलन
​"किसान देश का अन्नदाता है, लेकिन नकली दवाओं के कारोबारी उसकी मेहनत और भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। पिछले वर्ष भी ऐसे मामले आए थे, लेकिन कड़ी कार्रवाई न होने से इन जालसाजों के हौसले बुलंद हैं। अगर प्रशासन ने इस ज्ञापन पर 7 दिनों के भीतर प्रभावी कार्रवाई नहीं की, तो पीड़ित किसान और किसान संगठन लोकतांत्रिक व शांतिपूर्ण तरीके से उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।"
— पीड़ित किसान एवं किसान संगठन, रतलाम