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  जावरा कोर्ट का बड़ा फैसला: नाथूलाल हत्याकांड में पिपलोदा जनपद उपाध्यक्ष सुरेश जाट समेत  8 दोषियों को आजीवन कारावास

 

 

रतलाम, 13 अगस्त(ई खबर टुडे) ।  जिले के जावरा क्षेत्र के बहुचर्चित कंचनखेड़ी नाथूलाल चौधरी हत्याकांड में जावरा न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश  जे.बी.एस. राजपूत की अदालत ने गत  दिवस इस  हत्याकांड  में निर्णय सुनाते हुए पिपलोदा के कांग्रेस नेता  जनपद उपाध्यक्ष सुरेश जाट समेत  आठ आरोपियों को दोषी करार दिया। सभी आरोपियों को हत्या  के अपराध के लिए आजीवन कारावास  की सजा सुनाई गई है। 

 फरियादी ने दर्ज कराई थी रिपोर्ट

अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार मामले की रिपोर्ट  विकास पिता मुकेश चौधरी निवासी ग्राम आक्या कोली, जिला उज्जैन (हाल मुकाम ग्राम कंचनखेड़ी, पिपलौदा) ने दर्ज कराई थी। फरियादी ने पुलिस को बताया था कि वह अपने रिश्ते के नानाजी नाथूलाल चौधरी के साथ खेती का काम करता था और घटना वाले दिन खेत पर मौजूद था। उसकी रिपोर्ट पर पुलिस ने पहले धारा  307, 147, 120-बी  के तहत मामला दर्ज किया, बाद में नाथूलाल की मृत्यु होने पर धारा  302  जोड़ी गई थी ।

खेत पर घेरकर किया था हमला

अभियोजन के अनुसार  24 जनवरी 2024  को सुबह  11 बजे से 11:45 बजे के बीच  नाथूलाल चौधरी खेत की ओर जा रहे थे। उसी दौरान  पिपलोदा जनपद उपाध्यक्ष सुरेश जाट, राहुल जाट, कपिल जाट, विकास उर्फ भूरा जाट, सुभाष जाट, बलराम जाट, अवतार सिंह जाट और विक्रम जाट ने उन्हें घेर लिया। आरोपियों ने लोहे की टॉमी, लोहे के पाइप, लाठी-डंडों और अन्य घातक हथियारों से हमला किया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आरोपियों ने नाथूलाल को जान से मारने की नीयत से बेरहमी से पीटा, जिससे उनके हाथ-पैरों, उंगलियों और शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आईं और अत्यधिक रक्तस्राव हुआ।

इलाज के दौरान हुई मौत

घटना के बाद घायल नाथूलाल को पहले  जावरा सिविल अस्पताल, फिर रतलाम मेडिकल कॉलेज और बाद में  इंदौर रेफर किया गया। कई दिनों तक इलाज चलने के बावजूद 3 फरवरी 2024 को उनकी मृत्यु हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर गंभीर चोटें और कई स्थानों पर फ्रैक्चर पाए गए, जिन्हें अदालत ने हत्या के लिए पर्याप्त चिकित्सकीय साक्ष्य माना।

 पुरानी रंजिश बनी हत्या की वजह

मृतक के पुत्र धर्मेंद्र चौधरी ने अदालत में बयान दिया कि परिवार का आरोपियों के साथ पहले से विवाद चल रहा था और एक पुराने आपराधिक मामले को लेकर समझौते का दबाव बनाया जा रहा था। अदालत ने इस पृष्ठभूमि को घटना के संभावित कारण के रूप में माना और कहा कि आरोपी सामान्य उद्देश्य से एकत्र होकर हथियारों के साथ पहुंचे थे।

अदालत ने सुनाई कठोर सजा

न्यायालय ने सभी आठ आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 148 और 302/149 के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने धारा 148 के तहत तीन-तीन वर्ष का सश्रम कारावास और 5-5 हजार रुपये अर्थदंड तथा धारा 302/149 के तहत आजीवन कारावास और 20-20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड चुकाने में व्यतिक्रम होने पर क्रमशः 2 माह और 6 माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।  अदालत ने यह भी आदेश दिया कि विचारण अवधि में जेल में बिताया गया समय दंड में समायोजित किया जाएगा।

इस फैसले के साथ करीब ढाई वर्ष से चल रहे कंचनखेड़ी हत्याकांड में न्यायालय ने अभियोजन पक्ष के प्रत्यक्षदर्शी, चिकित्सकीय और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को स्वीकार करते हुए सभी आरोपियों को हत्या का दोषी मानते हुए कठोर दंड सुनाया।

हत्या के आरोप में पद से हटाया था सुरेश जाट को 

पिपलोदा जनपद पंचायत में चुनाव जीतकर उपाध्यक्ष बने कांग्रेस नेता सुरेश जाट को हत्याकांड में गिरफ्तार होने के बाद उनके पद से हटा दिया गया था। सुरेश जाट ने  पिपलोदा जनपद पंचायत का उपाध्यक्ष रहते हुए हत्या के इस अपराध में भागीदारी की थी। हत्याकांड में दोषसिद्ध होने के बाद अब जनपद पंचायत सदस्य का एक पद अब रिक्त हो चूका है।