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 नरवाई एवं पराली जलाने की घटनाओ पर नियंत्रण हेतु टास्क फोर्स गठित करने, स्ट्रॉ मेनेजमेंट सिस्टम तथा फसल अवशेषों को आय के नए स्रोत में परिवर्तित करने के दिए निर्देश

 नरवाई और पराली जलाने पर नियंत्रण के लिए मुख्य सचिव ने वीसी के माध्यम से की समीक्षा*
 

 

रतलाम, 15 अक्टूबर(इ खबर टुडे)। नरवाई एवं पराली जलाने वाले राज्य पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, राजस्थान व मध्यप्रदेश में से सर्वाधिक घटनाएं  मध्यप्रदेश में दर्ज की जा रही है। इन घटनाओ पर प्रभावी नियंत्रण हेतु राज्य स्तर पर मुख्य सचिव मध्यप्रदेश शासन द्वारा सभी जिला कलेक्टर एवं जिला पुलिस अधीक्षकों की ऑनलाइन बैठक ली गई।

ऑनलाइन बैठक में नरवाई एवं पराली जलाने की घटनाओ पर प्रभावी नियंत्रण हेतु ग्राम, विकासखण्ड व जिला स्तर पर टास्क फोर्स गठित कर कार्यवाही करने के निर्देश जारी किए गए। नरवाई एवं पराली जलाने से किसानों को हतोत्साहित करने हेतु कानूनी एवं दंडात्मक कार्यवाही के साथ ही नरवाई प्रबंधन में उपयोगी कृषि यंत्र जैसे स्ट्रॉ मेनेजमेंट सिस्टम (SMS) को हार्वेस्टरों के साथ अनिवार्य उपयोग करने पर जोर दिया गया। खेत में बचे फसल अवशेषों को उपयोग में लेने हेतु गौशाला के साथ नरवाई प्रबंधन यंत्रों को मैप करने के साथ ही नरवाई एवं पराली इकठ्ठा करने वाले एग्रिगेटर को CBG (कम्प्रेस्ड बायो गैस) प्लांट के साथ जोड़कर फसल अवशेषों को आय के नए स्रोत में परिवर्तित करने हेतु निर्देश दिए गए।

रबी फसल की कटाई के पश्चात गेहू के बचे फसल अवशेषों को जलाने की घटनाए पूरे प्रदेश में व्यापक स्तर पर होती है। जिसे रोकने हेतु अभी से तैयारी करना एवं उचित समाधानों को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। खेत में ही इन सीटू नरवाई प्रबंधन हेतु उपयोगी कृषि यंत्र देशी पाटा जोकि कम लागत एवं आसान बनावट के लिए जाना जाता है।

इस यंत्र का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाना है, सोशल मीडिया के युग में प्रचार प्रसार को नया आयाम देते हुए किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, मध्यप्रदेश के द्वारा इंस्टाग्राम पर secretaryagrimp नामक प्रोफाइल के द्वारा रील के माध्यम से कृषि की आधुनिक तकनीकों को किसानों के बीच प्रसारित किया जा रहा है।

नरवाई प्रबंधन हेतु क्षेत्र अनुसार, फसल अनुसार उचित यंत्र का चयन करना आवश्यक है, गेहू की कटाई स्वचालित रीपर, ट्रैक्टर चालित रीपर कम बाइंडर, कॉम्बो कम्बाइन हार्वेस्टर आदि यंत्रों से करने पर फसल अवशेष खेत में नहीं बचते है, साथ ही पशुओ हेतु चारा भी उपलब्ध हो जाता है। सामान्य हार्वेस्टर से कटाई करने पर भी खेत में बचे फसल अवशेषों को स्ट्रॉरीपर, बैलर के माध्यम से भूसे में परिवर्तित कर पशुओ के लिए उपयोग किया जा सकता है। खेत में बचे डंठल, टूठ आदि अवशेषों को देशी पाटा, मल्चर, रोटोवेटर आदि यंत्रों के द्वारा मिट्टी में मिलाकर ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा को मृदा में बढ़ाया जा सकता है।