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रतलाम / पद के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितता पर बड़ी कार्रवाई: धामनोद नगर परिषद उपाध्यक्ष व पार्षद लोकेंद्रसिंह सिसोदिया पद से हटाए गए

 

​रतलाम, 29 दिसंबर (इ खबर टुडे)। नगर परिषद धामनोद के उपाध्यक्ष एवं पार्षद लोकेंद्रसिंह सिसोदिया को अपने पद का दुरुपयोग करने, वित्तीय अनियमितताओं और भाई की टेंट फर्म के सरकारी भुगतानों में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष हित से जुड़े होने के मामले में तत्काल प्रभाव से पार्षद पद से हटा दिया गया है। यह कड़ा आदेश कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी अजय कटेसरिया द्वारा सोमवार को पारित किया गया।  

धामनोद निवासी शिकायतकर्ता माणकलाल डिंडोर ने लोकेंद्रसिंह सिसोदिया द्वारा अपने पद का गलत इस्तेमाल कर अपने भाई चिकोरसिंह सिसोदिया की फर्म 'सिसौदिया टेंट हाउस' को नगर परिषद के टेंडर दिलाने और वित्तीय लाभ पहुंचाने की शिकायत दर्ज कराई थी। मामले में कोई कार्रवाई न होने पर शिकायतकर्ता ने इंदौर उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (WP No. 5524/2026) दायर की थी। माननीय उच्च न्यायालय के निर्देश पर कलेक्टर न्यायालय में इसकी विस्तृत जांच और सुनवाई शुरू की गई।  

​जांच में सामने आए अहम तथ्य 
नगर परिषद के मूल दस्तावेजों और वाउचरों की जांच में पाया गया कि भले ही टेंट हाउस का खाता भाई के नाम पर था, लेकिन वर्ष 2012-13 के कुछ भुगतानों में खुद लोकेंद्रसिंह सिसोदिया के हस्ताक्षर हैं और उन्होंने स्वयं राशि प्राप्त की है। वर्ष 2025 के टेंडर प्रक्रिया में भाई की फर्म द्वारा रिश्तेदार से जुड़ी जानकारी में 'निरंक' दर्ज कर तथ्य छिपाए गए थे, जिसके चलते नगर परिषद ने उक्त निविदा को निरस्त कर 15 हजार रुपये की सिक्योरिटी राशि जब्त कर ली थी। जांच रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई कि मंदिर प्रबंधन/शासकीय भूमि (सर्वे क्रमांक 1420) पर मैरिज गार्डन और गोदाम बनाकर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं, जिस पर नायब तहसीलदार द्वारा बेदखली और 1,00,000 के अर्थदंड का आदेश पहले ही जारी किया जा चुका है। 

मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम के तहत हुई कार्रवाई
कलेक्टर अजय कटेसरिया ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश नगरपालिक अधिनियम 1961 की धारा 352 के तहत पार्षद लोक सेवक की श्रेणी में आता है। लोकेंद्रसिंह का अपने निर्वाचित पद पर रहते हुए पारिवारिक व्यावसायिक गतिविधियों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हित जुड़ा होना अधिनियम की धारा 38(1)(ड)(i) का उल्लंघन है।  

​लोकहित और परिषद की निष्पक्षता को ध्यान में रखते हुए, धारा 41(1) के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए लोकेंद्रसिंह सिसोदिया को तुरंत प्रभाव से पार्षद पद से मुक्त कर दिया गया है। नियमानुसार अनावेदक के पास इस आदेश के खिलाफ 30 दिनों के भीतर राज्य शासन के समक्ष अपील करने का अधिकार है।