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रतलाम / मोहर्रम पर कर्बला मैदान में लगने वाले मेलों और झूलों पर प्रतिबंध की मांग, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

​'सैय्यद फाउंडेशन' ने उठाई आवाज; कहा- धार्मिक परंपराओं का सम्मान, लेकिन व्यावसायिक मेलों से बढ़ रहा अपराध और अव्यवस्था का खतरा
 

​रतलाम, 23 जून (इ खबर टुडे)। नगर में मोहर्रम के अवसर पर आयोजित होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों की पवित्रता बनाए रखने और सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की मांग को लेकर 'सैय्यद फाउंडेशन एजुकेशन एण्ड सोशल वर्क' संस्था ने जिला प्रशासन को एक महत्वपूर्ण शिकायती पत्र सौंपा है। संस्था के सदर सैय्यद अब्दुल्ला अली के नेतृत्व में जिला कलेक्टर, अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम), पुलिस अधीक्षक और थाना प्रभारी को संबोधित यह ज्ञापन जनसुनवाई में प्रस्तुत किया गया।

​सौंपे गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि जावरा नगर में प्रतिवर्ष 11 मोहर्रम को कर्बला मैदान में ताज़ियों के आगमन व ताज़िया ठंडा करने की परंपरा है। इसके साथ ही 12 मोहर्रम को 'खुट की फातिहा' का धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होता है। संस्था ने कहा कि उन्हें इन सभी धार्मिक परंपराओं से कोई आपत्ति नहीं है और वे इनका पूर्ण सम्मान करते हैं।

​परंतु, विगत अनेक वर्षों से इन धार्मिक अवसरों के आड़ में बड़े स्तर पर व्यावसायिक मेलों, झूलों, खान-पान की दुकानों और अन्य मनोरंजनात्मक गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है, जो कि चिंता का विषय है।

​असामाजिक तत्वों का जमावड़ा और सुरक्षा पर संकट
​संस्था का आरोप है कि इन व्यावसायिक गतिविधियों के कारण मैदान में अत्यधिक भीड़ एकत्रित हो जाती है। इस भीड़ का फायदा उठाकर कई असामाजिक तत्व छेड़छाड़, जेबकतरी और अन्य आपराधिक घटनाओं को अंजाम देते हैं, जिससे समाज में असुरक्षा का माहौल बनता है।

​अत्यधिक भीड़ सबसे बड़ा कारण
भारी भीड़ के चलते नगर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाती है। किसी आकस्मिक घटना, भगदड़ या आगजनी की स्थिति में राहत कार्य, अग्नि सुरक्षा और चिकित्सा सहायता जैसी आपातकालीन सेवाएं समय पर उपलब्ध कराना अत्यंत कठिन हो जाता है, जिससे बड़ी जनहानि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इन व्यवस्थाओं को संभालने के लिए प्रशासन, पुलिस, बस और स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य शासकीय अमलों को व्यापक स्तर पर अतिरिक्त संसाधन और मानव बल लगाना पड़ता है।

​जिम्मेदारी लेने वाला कोई अधिकृत आयोजक नहीं
​पत्र में यह गंभीर मुद्दा भी उठाया गया है कि इन मेलों और झूलों को आयोजित करने वाली कोई भी अधिकृत, पंजीकृत समिति या संस्था सामने नहीं है, जो इन गतिविधियों की संपूर्ण जिम्मेदारी ले सके। यह भी स्पष्ट नहीं है कि झूलों और अस्थाई दुकानों के संचालन हेतु आवश्यक प्रशासनिक अनुमतियां, सुरक्षा मानक, अग्निशमन व्यवस्था और चिकित्सा सुविधा के पुख्ता इंतजाम किसके द्वारा सुनिश्चित किए जा रहे हैं। नगर के जिम्मेदार नागरिकों और उलेमा-ए-किराम का मानना है कि धार्मिक कार्यक्रमों को इन व्यावसायिक मेलों से पृथक रखा जाना चाहिए ताकि धार्मिक गरिमा और पवित्रता बनी रहे।

​प्रशासन से की गई ये मुख्य मांगें
​11 एवं 12 मोहर्रम के अवसर पर कर्बला मैदान में लगने वाले मेलों, झूलों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। ​बिना अनुमति संचालित हो रहीं अस्थाई दुकानों और मनोरंजनात्मक गतिविधियों की वैधानिक स्थिति की जांच की जाए। ​कर्बला मैदान पर केवल मूल धार्मिक कार्यक्रमों (फातिहा, दुआ, इबादत) को ही धार्मिक भावना के अनुरूप संपन्न कराया जाए। ​कानून व्यवस्था, यातायात और जनसुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उचित प्रशासनिक आदेश जारी किए जाएं।

​इस ज्ञापन के साथ नगर के कई गणमान्य समाजजनों और धार्मिक संस्थाओं का हस्ताक्षर युक्त समर्थन पत्र भी संलग्न किया गया है। अब देखना यह है कि आगामी मोहर्रम पर्व को देखते हुए प्रशासन इस पर क्या कड़ा रुख अपनाता है।