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1 करोड़ के लेन-देन में गोलीबारी और षड्यंत्र का मामला: आरोपी आदित्य सोमानी की जमानत याचिका न्यायालय ने की खारिज

 

 

रतलाम, 26 जुलाई(इ खबर टुडे)। रतलाम के बहुचर्चित गोलीबारी और आपराधिक षड्यंत्र से जुड़े मामले में द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश आशीष श्रीवास्तव की अदालत ने आरोपी आदित्य पिता राजेश सोमानी निवासी सदर बाजार, बड़ी सरवन (रतलाम) का प्रथम नियमित जमानत आवेदन निरस्त कर दिया है।  

जानकारी के अनुसार ​घटना पिछले माह 19 जून की दोपहर करीब 3:16 बजे की है। थाना दीनदयाल नगर क्षेत्र के अंतर्गत फरियादी कमल के घर के बाहर मोटरसाइकिल पर दो मुंह बांधे अज्ञात व्यक्ति आए। फरियादी की पत्नी मनीषा सोनी ने जब खिड़की से बाहर देखा, तब एक आरोपी ने जान से मारने की नीयत से उस पर पिस्टल से गोली चला दी। महिला के समय रहते झुक जाने के कारण गोली खिड़की के कांच को फोड़ती हुई निकल गई। पुलिस ने धारा 109 (1) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की।  

​CCTV और पूछताछ में खुला षड्यंत्र का राज
मामले की जांच के दौरान 20 जून 2026 को फरियादी द्वारा प्रस्तुत सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने सह-आरोपी विनीत उर्फ चुचु, भोला उर्फ मोनू, कन्हैयालाल उर्फ कान्हा, सिराज और अर्जुन को गिरफ्तार किया। पूछताछ और मेमोरेंडम बयानों में आरोपियों ने खुलासा किया कि फरियादी कमल से आवेदक/आरोपी आदित्य का लगभग 1 करोड़ रुपये के लेन-देन को लेकर विवाद चल रहा था। उक्त राशि निकलवाने के लिए 40 प्रतिशत कमीशन के एवज में अन्य सह-आरोपी गोलू बाबा उर्फ योगेंद्र और वीनू शर्मा के साथ मिलकर फरियादी के परिवार पर गोलीबारी करने की साजिश रची गई थी।  

​इसके बाद पुलिस ने मामले में धारा 61 (2) बीएनएस तथा 25, 27 आयुध अधिनियम की वृद्धि करते हुए 26 जून 2026 को आरोपी आदित्य सोमानी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। 

​आरोपी के अधिवक्ता ने कोर्ट में तर्क दिया कि फरियादी के पुत्र की शिकायत पर दर्ज एक अन्य मामले (थाना सरवन) में आरोपी 18 जून 2026 से ही न्यायिक अभिरक्षा में बंद था। अतः 19 जून की घटना में उसकी प्रत्यक्ष या परोक्ष संलिप्तता नहीं हो सकती। साथ ही यह भी कहा गया कि पैसों की देनदारी से बचने के लिए उस पर झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक विवेक उपाध्याय ने जमानत का मौखिक विरोध करते हुए कहा कि आरोपी पर गंभीर अपराध का आरोप है और जमानत मिलने पर वह गवाहों को डरा-धमकाकर साक्ष्य प्रभावित कर सकता है।

कोर्ट की तल्ख टिप्पणी और फैसला
​न्यायालय ने बचाव पक्ष के तर्कों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि आरोपी पर आपराधिक षड्यंत्र (साजिश) रचने का आरोप है। षड्यंत्र घटना से पूर्व रचा जाता है और इसके लिए आरोपी का घटना स्थल पर व्यक्तिगत रूप से मौजूद होना अनिवार्य नहीं है। केवल जेल में निरुद्ध होने मात्र से उसकी संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता।  

​अदालत ने करोड़ों के लेनदेन के विवाद और अपराध की गंभीरता व प्रकृति को देखते हुए आरोपी आदित्य सोमानी की नियमित जमानत याचिका को निरस्त करने का आदेश सुनाया।