बंजली में शासकीय भूमि पर फर्जी मज़ार बनाकर अतिक्रमण करने के मामले में न्यायालय का बड़ा फैसला, स्टे आवेदन निरस्त
रतलाम, 18 सितंबर (इ खबर टुडे)। ग्राम बंजली स्थित करोडों रु मूल्य की शासकीय चरनोई भूमि पर फर्जी मज़ार बनाकर किए गए अवैध अतिक्रमण के मामले में न्यायालय द्वारा एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया गया है। दशम व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ खण्ड, रतलाम अरुण सिंह ठाकुर ने वादी फिरोज मस्तान बाबा द्वारा प्रस्तुत अंतरिम स्थगन (स्टे) आवेदन को पूरी तरह से निरस्त कर दिया है। न्यायालय के इस फैसले के बाद, शिकायतकर्ता नरेन्द्र शर्मा (बंटी बजरंगी) ने कलेक्टर रतलाम को ज्ञापन सौंपकर शासकीय भूमि से अवैध निर्माण और अतिक्रमण को तत्काल हटाने की मांग की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम बंजली स्थित शासकीय चरनोई भूमि (सर्वे क्रमांक 44, कुल रकबा 0.200 हेक्टेयर) में से लगभग 0.03 हेक्टेयर भूमि पर हजरत मस्तान शाह बाबा दरगाह के नाम पर अवैध कब्जा कर निर्माण कार्य किया गया था। इस संबंध में ग्राम धामनोद निवासी नरेन्द्र शर्मा (बंटी बजरंगी ) द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों को लिखित शिकायत दर्ज कराई गई थी।
शिकायत के आधार पर तहसीलदार रतलाम शहर द्वारा राजस्व प्रकरण क्रमांक 01/अ-68/2026-27 दर्ज कर स्थल निरीक्षण, पटवारी रिपोर्ट एवं पंचनामा तैयार कराया गया। सुनवाई की प्रक्रिया पूर्ण करने के पश्चात 26 जून 2026 को तहसीलदार न्यायालय द्वारा उक्त भूमि को शासकीय चरनोई दर्ज पाते हुए अवैध कब्जा प्रमाणित माना गया। तहसीलदार ने मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 248 के तहत अतिक्रमणकर्ता को बेदखल करने और ₹3,000/- का अर्थदंड लगाने का आदेश पारित किया था।
सिविल कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?
तहसीलदार के बेदखली आदेश के विरुद्ध मुतवल्ली फिरोज मस्तान बाबा ने दशम व्यवहार न्यायाधीश (कनिष्ठ खण्ड) रतलाम के समक्ष 'व्यवहार वाद क्रमांक 184ए/2026' दायर कर तहसीलदार के नोटिस को शून्य घोषित करने और स्टे (अस्थायी निषेधाज्ञा - आदेश 39 नियम 1 व 2) देने की मांग की थी।
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश अरूण सिंह ठाकुर ने अपने 8 पृष्ठीय विस्तृत आदेश दो दिन पूर्व 16 सितंबर में स्पष्ट किया कि वादी ऐसा कोई भी दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत करने में पूर्णतः असफल रहा, जिससे यह सिद्ध हो सके कि मध्य प्रदेश शासन ने उक्त शासकीय चरनोई भूमि उसे या किसी ट्रस्ट/कमेटी को आवंटित की थी या वहां कोई निर्माण करने की अनुमति दी थी। प्रशासन द्वारा उर्स के आयोजन हेतु दी जाने वाली सीमित समय की अनुमतियां भूमि पर स्वामित्व या निर्माण का अधिकार प्रदान नहीं करतीं।
प्राकृतिक न्याय का पालन तहसीलदार द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी कर वादी को सुनवाई के पर्याप्त अवसर दिए गए थे, अतः राजस्व न्यायालय की कार्यवाही को अवैध नहीं माना जा सकता। म.प्र. भू-राजस्व संहिता की धारा 257 के तहत धारा 248 के आदेशों के विरुद्ध अपील/रिवीजन के अधिकार राजस्व न्यायालयों (एसडीओ/कलेक्टर) को हैं, न कि सिविल कोर्ट को।
न्यायालय ने माना कि वादी अपने पक्ष में प्रथम दृष्टया मामला सिद्ध करने में असफल रहा है, जिसके चलते अंतरिम राहत का आवेदन निरस्त कर दिया गया।
कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, तत्काल बुलडोजर कार्रवाई की मांग
न्यायालय से स्टे आवेदन निरस्त होने के उपरांत, शुक्रवार (18 सितंबर 2026) को आवेदक नरेन्द्र शर्मा (बंटी बजरंगी ) ने कलेक्टर रतलाम, अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ राजस्व) तथा तहसीलदार रतलाम शहर को लिखित आवेदन एवं कोर्ट के आदेश की प्रति सौंपी।
ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई है कि चूंकि राजस्व न्यायालय द्वारा अतिक्रमण प्रमाणित पाया जा चुका है और सिविल कोर्ट से भी कोई राहत नहीं मिली है, अतः ग्राम बंजली में स्थित शासकीय चरनोई भूमि से अवैध कब्जे/निर्माण को नियमानुसार तत्काल हटाकर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।
इस दौरान हिन्दू संगठन के नीलेश सोनी, ललित गोस्वामी, राजेश कटारिया, मुकुल पँवार, बंटी शर्मा, सिद्धार्थ पंड्या, कुंदन, गनी शक्तावत मौजूद रहे।