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 डीपी ज्वेलर्स द्वारा सनातन धर्म के अपमान का मामला गरमाया,न्यायालय ने पुलिस को दिए जांच के निर्देश

 कोर्ट में दायर हुआ निजी परिवाद,कोर्ट ने पुलिस से जांच प्रतिवेदन मांगा
 
 

रतलाम,18 जनवरी (इ खबरटुडे)। कारपोरेट जगत में शामिल हो चुके रतलाम के डीपी ज्वेलर्स को लेकर अक्सर नए नए विवाद सामने आते रहते है,लेकिन इस बार डीपी ज्वेलर्स द्वारा कंपनी के विज्ञापन में सनातन धर्मावलम्बियों की भावनाओं को आहत करने का मामला चर्चाओं में है। इस मामले में न्यायालय ने पुलिस को जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए है।

एडवोकेट प्रदीप सक्सेना ने बताया कि डीपी ज्वेलर्स ने रतलाम में अपने नए शोरुम का प्रचार करने के लिए प्रकाशित एक विज्ञापन में राम चरित मानस की प्रसिद्ध चौपाई रघुकुल रीत सदा चली आई का दुरुपयोग किया था। डीपी ज्वेलर्स के निदेशकों ने इस चौपाई की दूसरी पंक्ति को बदल कर अपने विज्ञापन के रुप में उपयोग किया था,जिससे सनातन धर्मावलम्बियों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई।

उल्लेखनीय है कि डीपी ज्वेलर्स का यह कारनामा सोशल मीडीया पर भी काफी छाया रहा था। सोशल मीडीया पर हजारों सनातन धर्मावलम्बियों ने डीपी ज्वेलर्स के इस कृत्य पर नाराजगी का प्रदर्शन किया था।

डीपी ज्वेलर्स के इसी विज्ञापन से आक्रोशित एक सनातनी शांतिलाल मालवीय ने माणकचौक पुलिस डीपी ज्वेलर्स के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने का प्रयास किया था,परन्तु माणकचौक पुलिस ने श्री मालवीय की शिकायत पर कोई कार्यवाही नहीं की। इसके बाद श्री मालवीय ने अपने अभिभाषक प्रदीप सक्सेना के माध्यम से न्यायालय में निजी परिवाद प्रस्तुत किया।

एडवोकेट श्री सक्सेना ने बताया कि डीपी ज्वेलर्स के निदेशकों ने अपने नए शोरुम के उद्घाटन के मौके पर एन  दशहरे के दिन 03 अक्टूबर को  अपने विज्ञापन में रामचरित मानस की प्रसिद्ध चौपाई को बिगाडकर "रघुकुल रीत सदा चली आई,स्वर्ण से हमेशा सुख समृद्धि घर आई" कर दिया था।जबकि रामचरित मानस की वास्तविक चौपाई  "रघुकुल रीत सदा चली आई,प्राण जाए पर वचन ना जाई" थी। चौपाई बिगाड़कर इसके विज्ञापनों के बड़े बड़े होर्डिंग लगाए लगाए गए। यही विज्ञापन अखबारों में भी प्रकाशित करवाए गए।   विज्ञापन में रामतरित मानस की चौपाई का इस तरह व्यवसायीकरण करने से सनातन धर्मावलम्बियों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई।

एडवोकेट प्रदीप सक्सेना के मुताबिक डीपी ज्वेलर्स के निदेशकों द्वारा अपने व्यावसायिक विज्ञापन में विमर्शित और विद्वेषपूर्ण कार्य,जो किसी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके उसकी धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आशय से दुष्कृत्य किया है। इसके साथ ही किसी व्यक्ति या सनातन समाज की धार्मिक भावनाओं को ठेस पंहुचाने के विमर्शित आशय से शब्द उच्चारित करनाभारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस)की धारा 299एवं धारा 302 के तहत दण्डनीय अपराध की श्रेणी में आता है।

 एडवोकेट सक्सेना ने बताया कि जब उनके पक्षकार द्वारा की गई शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की,तब व्यतित होकर उनके पक्षकार ने न्यायालय में डीपी ज्वेलर्स के विरुद्ध निजी परिवाद प्रस्तुत किया। डीपी ज्वेलर्स के समस्त निदेशकों के विरुद्ध जिला न्यायालय की न्यायिक दण्डाधिकारी कनिष्ठ खण्ड सुश्री वैशाली चौहान के न्यायालय में प्रस्तुत इस निजी परिवाद पर न्यायालय ने पुलिस थाना माणक चौक को जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने पुलिस को अपना जांच प्रतिवेदन 23 जनवरी को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

एडवोकेट श्री सक्सेना के अनुसार, पुलिस द्वारा जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किए जाने के बाद न्यायालय द्वारा निजी परिवाद की अगली सुनवाई की जाएगी।