रतलाम / जिले में रुकवाया गया बाल विवाह, परिजनों ने दी लिखित शपथ
रतलाम,26 मार्च (इ खबर टुडे)। जिले के सैलाना क्षेत्र में महिला एवं बाल विकास विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने समय रहते कार्रवाई करते हुए एक बाल विवाह रुकवाने में सफलता हासिल की है। यह कार्रवाई आज 'चाइल्ड हेल्प लाइन' से मिली गुप्त सूचना के आधार पर की गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम अमरपुरा खुर्द के निवासी पीयूष कटारा पिता कालू कटारा का विवाह 27 मार्च 2026 को राजस्थान के बांसवाड़ा जिले की फूलवंती मईड़ा के साथ तय हुआ था। बारात 27 मार्च की सुबह 5 बजे प्रस्थान करने वाली थी। शिकायत पर प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और विवाह को रुकवाया।
जाँच में नाबालिग निकला दूल्हा
शिकायत मिलते ही महिला बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी, पुलिस विभाग (ASI हितेश गेचवाल), पटवारी और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की एक संयुक्त टीम मौके पर पहुँची। जब बालक की 10वीं की अंकसूची (Marksheet) की जाँच की गई, तो उसकी जन्मतिथि 15 जून 2008 पाई गई। इस आधार पर दूल्हे की उम्र वर्तमान में 17 वर्ष 9 माह है, जो विवाह के लिए निर्धारित कानूनी उम्र (21 वर्ष) से कम है।
परिजनों ने मानी गलती, विवाह रोका
प्रशासनिक टीम ने मौके पर पंचनामा बनाया और परिवार को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत होने वाली कानूनी सजा और दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से समझाया। समझाइश के बाद बालक के पिता कालू कटारा और माता सुगना बाई ने लिखित बयान (कथन) दिया कि वे अज्ञानतावश यह विवाह कर रहे थे। परिजनों ने शपथ ली है कि जब तक लड़का 21 वर्ष और लड़की 18 वर्ष की आयु पूर्ण नहीं कर लेते, तब तक उनका विवाह नहीं किया जाएगा। परिवार ने यह भी स्वीकार किया कि यदि वे इस शपथ का उल्लंघन करते हैं, तो वे कानूनन सजा के स्वयं जिम्मेदार होंगे।
प्रशासन की अपील
परियोजना अधिकारी ने ग्रामीणों से अपील की है कि बाल विवाह एक सामाजिक बुराई और कानूनी अपराध है। यदि कहीं भी इस तरह के आयोजन की सूचना मिलती है, तो तुरंत प्रशासन या चाइल्ड हेल्पलाइन को सूचित करें।