रतलाम जिला जेल में अनोखी पहल: महिला बंदियों के संग मनाई गई छोटी दिवाली, रूप चौदस को दिया गया ‘मुक्ति दिवस’ का रूप
रतलाम, 07 नवंबर (इ खबर टुडे)। त्योहारों की खुशियों से कोई अछूता न रहे, इसी उद्देश्य के साथ शनिवार को रतलाम जिला जेल में महिला बंदियों के संग ‘छोटी दिवाली–रूप चौदस’ का पर्व अनूठे अंदाज में मनाया गया। कृष्ण कान्त मिश्रा (कृष्णा गुरुजी) के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम को ‘मुक्ति दिवस’ के रूप में मनाया गया, जहां महिला बंदियों के जीवन में नई आशा और सकारात्मकता का संचार किया गया।
आयोजन के दौरान कृष्णा गुरुजी ने महिला बंदियों को संबोधित करते हुए कहा कि रूप चौदस केवल बाहरी सौंदर्य का नहीं, बल्कि मन को सुंदर बनाने का पर्व है।
नरकासुर वध की पौराणिक कथा का संदर्भ देते हुए उन्होंने समझाया कि जिस प्रकार भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध किया था, उसी प्रकार हम सभी को अपने भीतर के क्रोध, लोभ, ईर्ष्या, अहंकार और बदले की भावना जैसे विकारों को छोड़ने का संकल्प लेना चाहिए। मन के अंधकार को दूर कर आशा का दीप जलाना ही इस ‘मुक्ति दिवस’ का मुख्य संदेश है। इस दौरान महिला बंदियों ने धैर्य, करुणा और सकारात्मक सोच के साथ अपने जीवन को नई दिशा देने का संकल्प लिया।
आठवें वर्ष भी जारी रहा सेवा और प्रेरणा का सिलसिला
लगातार आठवें वर्ष मनाए जा रहे इस प्रेरणादायक उत्सव का आयोजन पूर्व में इंदौर, भोपाल, देवास और उज्जैन की जेलों में सफलतापूर्वक किया जा चुका है। इसी कड़ी में इस वर्ष रतलाम जिला जेल की महिला बंदियों के साथ दीपावली की खुशियां साझा की गईं। कार्यक्रम के दौरान महिला बंदियों को सौंदर्य प्रसाधन सामग्री और मिठाइयां वितरित की गईं, जिससे जेल की चारदीवारी के भीतर भी अपनत्व और त्योहार का भरपूर उल्लास नजर आया।
सुधार और नैतिक उत्थान के प्रयास जारी: जेल अधीक्षक
रतलाम जिला जेल के अधीक्षक लक्ष्मण सिंह भदौरिया ने जानकारी दी कि जेल में 18 से 21 वर्ष की किशोरावस्था के बंदियों को अन्य बंदियों से पूरी तरह पृथक रखा जाता है। उन्होंने बताया कि बंदियों के मनोवैज्ञानिक और नैतिक उत्थान के लिए जेल प्रशासन द्वारा समय-समय पर धार्मिक, आध्यात्मिक और रोजगार परक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, ताकि वे रिहाई के बाद समाज की मुख्यधारा से जुड़कर एक बेहतर जीवन जी सकें।