परंपरा और उल्लास: रतलाम के सिलावटों का वास में 'रंग तेरस' की धूम
रतलाम,16 मार्च (इ खबर टुडे)। शहर के सिलावटों का वास क्षेत्र में सोमवार को कुमावत समाज द्वारा पारंपरिक दो दिवसीय पर्व का हर्षोल्लास के साथ आगाज हुआ। रंग तेरस के अवसर पर पूरा क्षेत्र सांस्कृतिक उल्लास और सद्भावना के रंगों में सराबोर नजर आया। आयोजन की खास बात यह रही कि समाज के वरिष्ठजनों ने उन घरों में जाकर खुशियां बांटीं, जहां पिछले एक वर्ष में किसी सदस्य का निधन हुआ था।
कुमावत समाज की गौरवशाली परंपरा के अनुसार, समाज के पदाधिकारी और वरिष्ठजन सबसे पहले उन परिवारों के बीच पहुंचे जहां बीते एक साल में गमी (निधन) हुई थी। वहां परिजनों को रंग लगाकर शोक के माहौल से बाहर निकाला गया और मुख्य गेर में शामिल किया गया। इस अनूठी पहल ने समाज में एकजुटता और आपसी प्रेम का संदेश दिया।
दोपहर बाद चढ़ा रंगों का खुमार
यूं तो बच्चों की टोलियां सुबह से ही पिचकारियां लेकर सिलावटों का वास की गलियों में सक्रिय थीं, लेकिन उत्सव का असली रंग दोपहर 12 बजे के बाद जमा। मकानों के बाहर पानी के ड्रम भरकर रखे गए थे। बच्चे, बूढ़े, युवा और महिलाओं ने एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर पर्व की बधाई दी। ढोल, बैंड और डीजे की धुन पर थिरकते हुए समाजजन रंगारंग गेर के रूप में निकले।
आज रात चंटिये और सेंव का वितरण
उत्सव के पहले दिन के दूसरे चरण में सोमवार रात को समाज के मंदिर के समक्ष विशेष आयोजन होगा। ढोल की थाप पर युवाओं द्वारा पारंपरिक 'चंटिये' खेले जाएंगे। इसके पश्चात समाजजनों को प्रसाद स्वरूप रतलाम की प्रसिद्ध सेंव का वितरण किया जाएगा। दो दिवसीय इस आयोजन को लेकर पूरे सिलावटों का वास में उत्साह का माहौल है।
गोट का आयोजन
दो दिवसीय उत्साह के दौरान कुमावत समाज दूसरे दिन गोट का आयोजन करते है। मंगलवार को समाज के लोग दोपहर में ढोल के साथ अमृतसागर बगीचे जायेगे, जहा समाजजन एक दूसरे से मिलकर पर्व की शुभकामनाओ देते है। ततपश्चात समाज की महिलाओ द्वारा बगीचे से गंगाजल भरकर सिलावटों के वास स्थित समाज के मंदिर पहुंचते है। इसके बाद समाज के सभी लोग एक साथ समाज की धर्मशाला में भोजन करते है।
इस अवसर पर समाज के वरिष्ठ जूना मंदिर पटेल अप्पू कुमावत, नया मंदिर पटेल मोहनलाल कुमावत, दामोदर कुमावत, भेरूलाल कुमावत, कारू कुमावत, पूर्व पार्षद सुशील कुमावत, श्याम सूंदर कुमावत, नरेंद्र कुमावत, संतोष कुमावत, जीवन कुमावत सहित बड़ी संख्या में समाजजन शामिल रहे।