{"vars":{"id": "115716:4925"}}

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी ईमानदारी: बिरमावल पंचायत सचिव पर रिश्वत लेने का आरोप, सीसीटीवी फुटेज के साथ हुई शिकायत (देखिए वीडियो)

 

 

रतलाम,09 मई (इ खबर टुडे)। जिले की ग्राम पंचायत बिरमावल में भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला प्रकाश में आया है, जहाँ एक स्थानीय व्यवसायी ने पंचायत सचिव पर बकाया भुगतान जारी करने के एवज में रिश्वत लेने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित दशरथ पाटीदार, जो ग्राम बिरमावल में 'नवदुर्गा मोटर वाइंडिंग' के नाम से अपनी दुकान संचालित करते हैं, ने जिला पंचायत रतलाम के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) को एक लिखित शिकायत और शपथ-पत्र सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है।

शिकायत के अनुसार, दशरथ पिछले 4-5 वर्षों से शासन की योजनाओं के अंतर्गत पंचायत के मोटर वाइंडिंग का कार्य करते आ रहे हैं। उनका पंचायत पर कुल 42,000 रुपये बकाया था, जिसमें से 29,000 रुपये का भुगतान तो हो गया, लेकिन शेष 13,000 रुपये और नए काम के 25,000 रुपये, यानी कुल 38,000 रुपये का भुगतान पिछले कई महीनों से अटका हुआ था। पीड़ित का आरोप है कि ग्राम पंचायत सचिव जगदीश गुजराती ने इस राशि को पास कराने के नाम पर उनसे सुविधा शुल्क की मांग की।

<a style="border: 0px; overflow: hidden" href=https://youtube.com/embed/gAobv48mErw?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/gAobv48mErw/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" title="YouTube Shorts video player" width="315">

मामले में नया मोड़ तब आया जब दशरथ ने दावा किया कि दिनांक 18 अप्रैल 2026 की रात लगभग 8:00 बजे सचिव जगदीश गुजराती स्वयं उनकी दुकान पर पहुँचे और बिल पास करवाने का भरोसा दिलाकर 5,000 रुपये की रिश्वत ली। यह पूरी घटना दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। दशरथ पाटीदार ने अपने हलफनामे में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि पैसे लेने के बावजूद उनका भुगतान नहीं किया गया और जब उन्होंने सचिव से संपर्क किया, तो उनके साथ अभद्र व्यवहार और गाली-गलौज की गई।

पीड़ित व्यवसायी ने अब सीसीटीवी फुटेज और पेनड्राइव के साथ जिला प्रशासन के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने मांग की है कि इस भ्रष्टाचार के विरुद्ध कड़ी दंडात्मक कार्यवाही की जाए, सचिव को पद से बर्खास्त किया जाए और उनका रुका हुआ पैसा वापस दिलाया जाए। 

नोटरी द्वारा प्रमाणित इस शिकायत के बाद अब सबकी नजरें जिला पंचायत प्रशासन की कार्यवाही पर टिकी हैं कि वे इस डिजिटल साक्ष्य वाले भ्रष्टाचार के मामले में क्या कदम उठाते हैं।