रतलाम / महू-नीमच हाईवे पर दरगाह के नाम पर 'अतिक्रमण' को लेकर आक्रोश, हिंदू संगठनों ने सौपा ज्ञापन
रतलाम, 12 मई (इ खबर टुडे। शहर के जावरा फाटक क्षेत्र में महू-नीमच हाईवे पर स्थित 'पहलवान बाबा की दरगाह' पर हो रहे पक्के निर्माण और कथित अवैध कब्जे को लेकर मंगलवार को हिंदू संगठनों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। विभिन्न संगठनों और हिंदू समाज के प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर अवैध निर्माण को तत्काल ध्वस्त करने और प्रस्तावित आयोजनों पर रोक लगाने की मांग की है।
हिंदू संगठनों द्वारा जिलाधीश के नाम सौंपे गए ज्ञापन में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। संगठनों का कहना है कि शासकीय भूमि सर्वे क्रमांक 104 पर स्थित दरगाह के वास्तविक क्षेत्रफल को बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। हाईवे के दोनों ओर लोहे की चद्दरें और स्टील की जालियां लगाकर करीब 25-30 फीट लंबे क्षेत्र में अवैध शेड तान दिया गया है। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि इस स्थल का प्रकरण (RCSA 337/2024) तृतीय व्यवहार न्यायाधीश के न्यायालय में विचाराधीन है। मामले की अगली सुनवाई 16 अगस्त 2026 को है, इसके बावजूद वहां धड़ल्ले से निर्माण कार्य जारी है।
हाइवे पर दुर्घटना का बढ़ता खतरा
हिंदू समाज के प्रतिनिधियों ने चिंता जताई कि यह दरगाह महू-नीमच हाईवे के मुख्य मार्ग के बिल्कुल बीचों-बीच स्थित है। इस मार्ग पर भारी वाहनों की चौबीसों घंटे आवाजाही रहती है। अतिक्रमण के कारण मार्ग संकरा हो रहा है, जिससे किसी भी वक्त बड़ी जनहानि या भीषण सड़क दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
उर्स और कव्वाली के आयोजन पर रोक की मांग
ज्ञापन में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई है कि आगामी 13, 14 और 15 मई को बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के वहां उर्स और कव्वाली के बड़े आयोजन की तैयारी की जा रही है। संगठनों ने जनहित और यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए इस आयोजन पर तत्काल रोक लगाने की अपील की है।
प्रशासनिक कार्रवाई की चेतावनी
हिंदू संगठनों ने दोटूक शब्दों में मांग की है कि वर्तमान में चल रहे अवैध निर्माण को तुरंत जमींदोज किया जाए। अवैध कब्जे में संलिप्त लोगों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए। भविष्य में यहाँ किसी भी सार्वजनिक या धार्मिक आयोजन की अनुमति न दी जाए।
ज्ञापन सौंपते समय बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समाजजन उपस्थित रहे। इसकी प्रतियां ADM, SDM और CSP कार्यालय में भी देकर त्वरित कार्रवाई की मांग की गई है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस संवेदनशील मामले में क्या कदम उठाता है।