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 रतलाम / आक्या देह में फर्जी बिल और आवास योजना में धांधली का आरोप, 100 ग्रामीणों ने कलेक्टरेट में बोला हल्ला

 

 

​रतलाम,15 सितंबर(इ खबर टुडे)। जनपद पंचायत पिपलोदा के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत आक्या देह के करीब 100 ग्रामीणों ने मंगलवार को रतलाम कलेक्टरेट पहुंचकर सरपंच, सचिव और सहायक सचिव (GRS) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर और जिला पंचायत प्रशासन के नाम शिकायती आवेदन सौंपकर पंचायत में हुए लाखों रुपये के भ्रष्टाचार, फर्जी बिलिंग और शासकीय योजनाओं में धांधली की निष्पक्ष जांच व दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर कागजी हेरफेर की गई है कि​ बिना नई लाइटें लगाए लगभग 1,79,000 की राशि का आहरण कर लिया गया, जबकि गांव में आज भी पुरानी लाइटें ही लगी हुई हैं। करीब 70,000 की लागत से बने चबूतरे का बिल 1,21,000 पास करवाकर शासकीय धन का गबन किया गया। सहायक सचिव (GRS) द्वारा अपने निजी नाले का निर्माण करवाकर उसकी राशि ग्राम पंचायत के खाते से फर्जी तरीके से निकाली गई।

​प्रधानमंत्री आवास और संबल योजना में अवैध वसूली
शिकायत पत्र में ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीबों को कुटीर स्वीकृत कराने के नाम पर सरपंच और सचिव द्वारा अवैध रूप से पैसों की मांग की जाती है। इसके अलावा, अंत्येष्टि और संबल योजना की सहायता राशि पात्र हितग्राहियों को न देकर अपात्र लोगों से साठगांठ कर जारी की जा रही है। पंचायत में बिना कार्य कराए कुओं और सीसी रोड के फर्जी बिल पास कराए गए हैं।

​नियम विरुद्ध नियुक्तियों पर भी उठाए सवाल
ग्रामीणों ने जनपद सीईओ को दिए आवेदन में यह मुद्दा भी उठाया कि पंचायत में पदस्थ चपरासी/चौकीदार की उम्र 60 वर्ष से अधिक हो चुकी है। पंचायत राज नियमों के अनुसार 60 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर सेवा स्वतः समाप्त हो जाती है, लेकिन इसके बावजूद उसे पद पर बनाए रखकर अवैध रूप से मानदेय का भुगतान किया जा रहा है।

​कठोर कार्रवाई और राशि वसूली की मांग
समस्त ग्रामवासियों ने ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि ग्राम पंचायत आक्या देह के सभी निर्माण कार्यों और वित्तीय अभिलेखों की त्वरित निष्पक्ष जांच कराई जाए। फर्जीवाड़ा करने वाले सरपंच, सचिव और सहायक सचिव को तत्काल पद से पृथक कर उनसे फर्जी तरीके से निकाली गई राशि की वसूली की जाए।