{"vars":{"id": "115716:4925"}}

 रतलाम के गणेश उत्सव पंडालों में दिलाया गया स्वदेशी अपनाने का संकल्प

 सकल हिंदू समाज ने स्वदेशी वस्तुओं और भारतीय जीवनशैली को अपनाने का किया आह्वान
 

 

रतलाम, 19 सितम्बर (इ खबर टुडे)। सकल हिंदू समाज द्वारा गणेश उत्सव की 11 दिवसीय कार्ययोजना के अंतर्गत शहर के विभिन्न गणेश उत्सव पंडालों में स्वदेशी जीवनशैली को लेकर जनजागरण अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान नागरिकों से स्वदेशी वस्तुओं को प्राथमिकता देने तथा दैनिक जीवन में भारतीय परंपराओं और जीवन मूल्यों को अपनाने का संकल्प दिलाया गया।

इस अवसर पर “यही मंत्र हो, यही साधना, भारत भव्य बनाना है। तंत्र स्वदेशी, मन स्वदेशी, भाव स्वदेशी लाना है” के संदेश के साथ नागरिकों को स्वदेशी के महत्व से अवगत कराया गया। वक्ताओं ने कहा कि देश की संस्कृति, परंपरा, भाषा, खान-पान, वेशभूषा और स्थानीय उत्पादों से जुड़ना केवल खरीदारी का विषय नहीं, बल्कि अपनी जड़ों और भारतीय जीवन-पद्धति से जुड़ने का माध्यम है।

अभियान के दौरान नागरिकों से आह्वान किया गया कि स्थानीय स्तर पर निर्मित वस्तुओं को प्राथमिकता दें और “लोकल को वोकल” बनाएं। आवश्यकता के अनुसार ही बाहरी उत्पादों का उपयोग करें तथा भारतीय उत्पादों और देश में निर्मित वस्तुओं को प्रोत्साहित करें।

स्वदेशी जीवनशैली के अंतर्गत भारतीय भोजन एवं देशी अनाज जैसे ज्वार, बाजरा, मक्का और रागी को अपनाने, यथासंभव घर का बना भोजन ग्रहण करने, भारतीय वेशभूषा को प्राथमिकता देने तथा घर-परिवार में मातृभाषा के उपयोग को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया।

इसके साथ ही नागरिकों से अपने घर एवं प्रतिष्ठानों की नामपट्टिकाओं में देवनागरी लिपि के प्रयोग, भारतीय अभिवादन एवं पारिवारिक संबोधनों को बढ़ावा देने, पारिवारिक आयोजनों में मितव्ययिता और पर्यावरण संरक्षण का ध्यान रखने तथा भारतीय तीर्थ एवं पर्यटन स्थलों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया गया।

अभियान में यह भी संदेश दिया गया कि जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ एवं अन्य पारिवारिक अवसरों को भारतीय तिथि और परंपराओं के अनुरूप मनाने तथा आने वाली पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और संस्कारों से परिचित कराने का प्रयास किया जाना चाहिए।

सकल हिंदू समाज ने कहा कि स्वदेशी का उद्देश्य केवल वस्तुओं के चयन तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने विचार, व्यवहार, भाषा, खान-पान, संस्कार और जीवनशैली में भारतीयता को स्थान देना है। गणेश उत्सव के माध्यम से समाज में स्वदेशी, संस्कार, सामाजिक जागरूकता और राष्ट्रभावना को मजबूत करने का यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।