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 रतलाम जिला चिकित्सालय के डॉक्टरों का कमाल: जटिल ऑपरेशन से सुधरा गलत जुड़ा पैर, बांसवाड़ा के गोरधन को मिला नया जीवन​​​​​​​

 

 

रतलाम, 26जुलाई (इ खबर टुडे)। जिला चिकित्सालय रतलाम के कुशल चिकित्सकों ने एक बार फिर अपनी विशेषज्ञता का लोहा मनवाते हुए एक जटिल अस्थि शल्य चिकित्सा (ऑर्थोपेडिक सर्जरी) को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। इस सफल ऑपरेशन के बदौलत चलने-फिरने में पूरी तरह लाचार हो चुके 24 वर्षीय युवक को नया जीवन मिला है।

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के ग्राम छायन बड़ी निवासी गोरधन (पिता नानजी) बीते वर्ष अक्टूबर में एक गंभीर सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए थे। हादसे में उनका पैर बुरी तरह घायल हो गया था। शुरुआती इलाज के तहत जिला चिकित्सालय बांसवाड़ा और तत्पश्चात एक निजी अस्पताल में उनका ऑपरेशन कराया गया, लेकिन इसके बावजूद पैर की हड्डी सही तरीके से नहीं जुड़ सकी।

​इलाज के बाद भी बिगड़ती गई स्थिति
लगातार तीन महीनों तक चले इलाज के बाद भी गोरधन की स्थिति सुधरने के बजाय बिगड़ती चली गई। पैर टेढ़ा हो गया और उनके लिए चलना-फिरना लगभग असंभव हो गया। स्थिति को देखते हुए उन्हें उदयपुर या जयपुर के बड़े अस्पतालों के लिए रेफर कर दिया गया। लगभग 6 से 7 महीने तक असहनीय पीड़ा और लाचारी झेलने के बाद, परिजनों को रतलाम जिला चिकित्सालय में पदस्थ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. भरत निनामा के बारे में जानकारी मिली।

​रतलाम में हुई जटिल शल्य चिकित्सा
उम्मीद की किरण लेकर परिजन गोरधन को रतलाम जिला चिकित्सालय लाए। यहाँ डॉ. भरत निनामा एवं डॉ. अभिनव जैन की टीम ने मरीज की गहन जाँच की। जाँच में पाया गया कि दुर्घटनाग्रस्त पैर गलत तरीके से जुड़ (Malunion) चुका है, जिसे दोबारा काटकर/री-सेट करके ऑपरेशन के जरिए सही करना ही एकमात्र रास्ता था।

​डॉक्टरों ने परिजनों को पूरी प्रक्रिया और इसमें शामिल संभावित जोखिमों की पारदर्शी जानकारी दी। परिजनों की सहमति मिलने के बाद मई माह में डॉ. भरत निनामा और डॉ. अभिनव जैन की टीम ने इस बेहद जटिल शल्य चिकित्सा को अंजाम दिया। इस पूरे ऑपरेशन के दौरान एनेस्थीसिया (निश्चेतन) की महत्वपूर्ण और संवेदनशील जिम्मेदारी डॉ. महेश मौर्य ने निभाई।

​पूरी तरह स्वस्थ होकर पैरों पर खड़े हुए गोरधन
सफल ऑपरेशन और लगभग एक महीने तक चले गहन उपचार व पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन) के बाद गोरधन का पैर अब पूरी तरह ठीक हो चुका है और वे अपने पैरों पर चलने में सक्षम हैं।

​सिविल सर्जन डॉ. ए.पी. सिंह ने डॉक्टरों की इस सफलता की सराहना की है। वहीं, नया जीवन पाने वाले गोरधन और उनके परिजनों ने जिला चिकित्सालय की पूरी टीम, डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ का सहृदय आभार व्यक्त करते हुए उनकी कार्यशैली की भूरी-भूरी प्रशंसा की है।