रतलाम के 7 युवाओं ने फतह किया दुर्गम भृगु लेक ट्रेक,रचा साहस का इतिहास
** खड़ी चढ़ाई और बर्फीले पहाड़ों से मुकाबला
** मौसम बना सबसे बड़ी चुनौती
** स्लाइडिंग तकनीक से रोमांचक वापसी
रतलाम,30 मई(इ खबर टुडे)। मध्य प्रदेश के रतलाम शहर के सात साहसी युवाओं ने हिमाचल प्रदेश के दुर्गम और चुनौतीपूर्ण भृगु लेक ट्रेक को सफलतापूर्वक पूरा कर अपनी हिम्मत, जज्बे और टीमवर्क का शानदार परिचय दिया है। आमतौर पर तीन दिनों में पूरी होने वाली इस कठिन ट्रैकिंग यात्रा को इन युवाओं ने मात्र दो दिनों में पूरा कर एक मिसाल कायम की।
इस साहसिक अभियान में पत्रकार किशोर सिलावट, संतोष घोड़ेटा, सचिन सोनी, रितेश सोनी, राहुल पांचाल, लखन सिंह सिसोदिया और वैभव जोशी शामिल थे। सभी युवाओं ने बिना किसी ट्रेकिंग कंपनी या पेशेवर गाइड की सहायता लिए स्वयं के प्रयासों से यह कठिन यात्रा पूरी की।
रतलाम से मनाली तक का सफर
यात्रा की शुरुआत 24 मई की शाम को रतलाम रेलवे स्टेशन से हुई। सभी साथी ट्रेन से चंडीगढ़ पहुंचे और वहां से एक ट्रैवलर वाहन किराए पर लेकर मनाली रवाना हुए। रात करीब 8 बजे मनाली पहुंचने के बाद सभी ने विश्राम किया और अगले दिन अपने साहसिक अभियान की शुरुआत की।
खड़ी चढ़ाई और बर्फीले पहाड़ों से मुकाबला
26 मई को सुबह मनाली के निकट गुलाबा (14 मोड़) से ट्रैकिंग शुरू हुई। पहले दिन करीब 4 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई को महज तीन घंटे में पूरा कर टीम दोपहर तक रोलाकोली बेस कैंप पहुंच गई। यहां रात बिताने के बाद अगले दिन सुबह 5 बजे सभी ने भृगु लेक की ओर अंतिम चढ़ाई शुरू की।
करीब 14 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित भृगु लेक तक पहुंचने के लिए युवाओं को 9 किलोमीटर का कठिन मार्ग तय करना पड़ा, जिसमें लगभग 5 किलोमीटर तक सिर्फ बर्फ से ढके पहाड़ों पर चलना पड़ा। एक स्थान पर 50 मीटर ऊंचे लगभग सीधे खड़े बर्फीले ढलान को पार करने में पूरी टीम को एक घंटे से अधिक समय तक संघर्ष करना पड़ा।
मौसम बना सबसे बड़ी चुनौती
यात्रा के दौरान मौसम और प्राकृतिक परिस्थितियों ने भी टीम की कड़ी परीक्षा ली। बर्फ और तेज धूप की चमक के कारण वैभव जोशी और रितेश सोनी की आंखों में गंभीर परेशानी उत्पन्न हो गई। वहीं अत्यधिक ठंड और तेज हवाओं के कारण सभी साथियों के चेहरे झुलस गए और शरीर सुन्न होने लगा। भृगु लेक पहुंचने के बाद पानी की कमी ने भी मुश्किलें बढ़ा दीं, जिसके चलते टीम ने दर्शन के तुरंत बाद वापसी का निर्णय लिया।
स्लाइडिंग तकनीक से रोमांचक वापसी
वापसी के दौरान जिस बर्फीले ढलान को चढ़ने में एक घंटा लगा था, उसे उतरना और भी अधिक जोखिम भरा था। इसी दौरान रास्ते में कुछ अन्य ट्रेकर्स और उनके पेशेवर गाइड मिले। उनकी मदद से रतलाम के युवाओं ने बर्फ पर स्लाइडिंग की तकनीक सीखी और जिस खतरनाक ढलान को पार करने में घंटों लग सकते थे, उसे महज एक मिनट में सुरक्षित पार कर लिया।
आस्था और साहस का संगम
भृगु लेक धार्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि यहां महर्षि भृगु ने कठोर तपस्या की थी। कठिन परिस्थितियों, शारीरिक पीड़ा और मौसम की चुनौतियों के बावजूद सभी युवा सुरक्षित रूप से रात करीब 10 बजे मनाली लौट आए।
इस साहसिक उपलब्धि ने न केवल रतलाम का गौरव बढ़ाया है, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि दृढ़ संकल्प, टीम भावना और आत्मविश्वास के बल पर किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है। रतलाम के इन सात युवाओं का यह अभियान युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।