शिक्षिका की क्रूरता के कारण 6 महीनों से बिस्तर पर पडी है नन्ही कोमल (देखें विडियो)
रतलाम,06 मई (इ खबरटुडे)। मजदूरी करके अपनी बेटियों को पढा लिखा कर अफसर बनाने का सपना देखने वाले अमरसिंह का सपना एक क्रूर शिक्षिका की क्रूरता ने इस तरह चकनाचूर किया कि बेटी पढ लिख कर अफसर बनना तो दूर चलने फिरने तक से मोहताज हो गई है। सरकारी स्कूल की शिक्षिका ने नन्ही बिटिया की डण्डों से इतनी पिटाई की,कि उसकी रीढ की हड्डी ही क्षतिग्र्रस्त हो गई और बिटिया अब पूरे समय बिस्तर पर पडे रहने को मजबूर है। बिटिया के इलाज पर लाखों रु.खर्च कर चुका उसका गरीब पिता इस बात से हैरान है कि दोषी शिक्षिका के विरुद्ध आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। पुलिस वालों ने भी मामले को रफा दफा ही कर दिया।
ये दर्दभरी कहानी है जावरा के इस्लामपुरा निवासी दिहाडी मजदूर अमरसिंह बागरी और उसकी ग्यारह साल की नन्ही बिटिया कोमल की। दो बेटियों के पिता अमरसिंह अपनी बेटियों को पढा लिखा कर उचे ओहदे तक पंहुचाना चाहता था और इसलिए मजदूरी करने के बावजूद वह अपनी दोनो बेटियों को पास के सरकारी स्कूल में पढने भेजता था।
डण्डों से बालिका की पिटाई
घटना पिछले साल 10 सितम्बर 2025 की है। हर दिन की तरह कोमल स्कूल गई थी। उसकी छोटी बहन 7 वर्षीय ज्वाला भी उसी स्कूल में कक्षा तीसरी में पढती थी। दोनो बच्चियां सुबह ग्यारह बजे स्कूल गई थी। दोपहर करीब साढे तीन बजे छोटी बेटी ज्वाला घर आई और उसने अपनी दादी रेशमबाई को बताया कि कोमल को उसकी टीचर ने मारा है और कोमल कक्षा में पडी है। वह उठ भी नहीं पा रही है।
यह खबर मिलते ही कोमल की दादी और पिता अमरसिंह, ज्वाला को साथ लेकर स्कूल पंहुची,तो उसने देखा कि कोमल कक्षा के एक कोने में पडी हुई है। जब उसने कोमल से पूछा कि क्या हुआ,तब कोमल ने बताया कि उसे उसकी टीचर ने डण्डों से कमर पर मारा था। उसके बाद वह उठ नहीं पा रही है। अमरसिंह ने जब टीचर से पूछा कि आपने कोमल को क्यो मारा? तो टीचर का कहना था कि यह चप्पल चुरा रही थी,इसलिए इसको मारा है। टीचर ने यह भी कहा कि अस्पताल में इसका इलाज करवा लो,इलाज का खर्चा मैैं दे दुंगी।
भोपाल के एम्स में हुआ आपरेशन
इसके बाद अमरसिंह अपनी बेटी कोमल को लेकर जावरा के शासकीय अस्पताल पंहुचा। कोमल की रीढ की हड्डी में जबर्दस्त अंदरुनी चोट लगी थी। जावरा के शासकीय चिकित्सालय के उपचार से कोमल की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। चिकित्सकों ने उसे इन्दौर रैफर कर दिया। अमरसिंह कोमल को लेकर एमवाय हास्पिटल इ्दौर लेकर गया। लेकिन वहां भी कोमल की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। इस तरह करीब तीन महीने गुजर गए।
इन्दौर एमवाय से अमरसिंह को भोपाल एम्स में जाने की सलाह दी गई। अमरसिंह अपनी बेटी को लेकर भोपाल पंहुचा,जहां जांच के बाद बताया गया कि कोमल की रीढ की हड्डी में चोट लगने के साथ ही स्पाइनल कार्ड भी क्षतिग्र्रस्त हो गई है,जिसकी वजह से वह उठ बैठ नहीं पा रही है। घटना के करीब साढे तीन महीने बाद 23 जनवरी 2026 को भोपाल के एम्स हास्पिटल में कोमल का आपरेशन किया गया।
इलाज का खर्च देने से इंकार
अमरसिंह करीब चार महीने तक बिस्तर पर पडी अपनी मासूम बिटिया को लेकर इसके इलाज के लिए इन्दौर भोपाल के चक्कर लगाता रहा। इस दौरान उसका करीब तीन लाख रु. का खर्च हो गया और उस पर कर्ज चढ गया। जावरा पंहुचने पर अमरसिंह,इस्लाम नगर जावरा के शासकीय स्कूल की शिक्षिका संतोषी परिहार के पास पंहुचा। स्कूल टीचर ने उससे कहा था कि बिटिया के इलाज का खर्च वह वहन करेगी। लेकिन जब अमरसिंह संतोषी परिहार के पास पंहुचा तो उसने इस बात से साफ इंकार कर दिया। उलटे वह अमरसिंह को धमकी देने लगी। उसने अमरसिंह को कहा कि वह इलाज के रुपए नहीं देगी। टीचर ने अमरसिंह को यह धमकी भी दी अगर उसने आइन्दा ऐसी कोइ मांग की तो वह उसे जान से खत्म करवा देगी।
जमानती धाराओं में दर्ज हुआ प्रकरण
लाचार अमरसिंह क्या कर सकता था। अनपढ और गरीब अमरसिंह ने अपनी बेटी के साथ हुई क्रूरता की कोई शिकायत भी कहीं दर्ज नहीं करवाई थी। शिक्षिका द्वारा इलाज के रुपए नहीं देने और धमकी देने से परेशान अमरसिंह पुलिस के पास पंहुचा। उसने जावरा के औद्योगिक क्षेत्र थाने पर पंहुचकर सारी कहानी बताई। चूंकि घटना को लगभग पांच महीने गुजर चुके थे,इसलिए जावरा पुलिस ने बेहद मामूली धाराओं में शिक्षिता संतोषी परिहार के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज करके अपने कत्र्तïव्य की इतिश्री कर ली।
अमरसिंह की बिटिया अभी भी बिस्तर पर ही पडी हुई है। एम्स के चिकित्सकों का कहना है कि अब उसका अपने पैरो पर खडे हो पाना और चल फिर पाना बेहद कठिन है। कोमल का एक आपरेशन और किया जाएगा,तब भी यह विश्वास के साथ नहीं कहा जा सकता कि वह अपने पैरो पर चल फिर सकेगी। भगवान की मर्जी होगी तभी यह संभव हो पाएगा।
दोषी शिक्षिका पर कोई कार्यवाही नहीं
एक नन्ही मासूम को जीवन भर के लिए लाचार बना देने वाली क्रूर शिक्षिका संतोषी परिहार के विरुद्ध मामूली जमानती धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया था। इतनी संगीन घटना कारित करने वाली क्रूर शिक्षिका के खिलाफ,शिक्षा विभाग ने कोई कार्यवाही नहीं की। ना तो कोई जांच की गई,ना ही शिक्षिका को स्कूल से स्थानान्तरित किया गया। घटना का दुष्परिणाम यह हुआ कि कोमल की पढाई तो छूट ही गई,उसकी छोटी बहन ज्वाला भी पढने लिखने से वंचित हो गई। जिस स्कूल की शिक्षिका ने कोमल के पिता को धमकी दी हो,उस स्कूल में अब कोमल की छोटी बहन कैसे पढ सकती है?
दरबदर की ठोकरें, कहीं सुनवाई नहीं
मजदूरी करके जीवन यापन करने वाले अमरसिंह के भाग्य में अब सिर्फ दरबदर की ठोकरें ही रह गई है। अपनी मासूम बिटिया के इलाज पर कर्ज लेकर लाखों रुपए खर्च कर चुके अमरसिंह ने कई जगहों पर मदद की गुहार लगाई लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। ना तो प्रशासन ने अब तक कोई मदद की और ना ही दोषी शिक्षिका के खिलाफ कोई कार्यवाही हुई।
बाल आयोग भी पंहुचा मामला
नन्ही बिटिया पर हुए अत्याचार का मामला जब बाल कल्याण समिति के संज्ञान में आया,तो बाल कल्याण समिति ने पूरी जानकारी बाल अधिकार आयोग को भिजवाई। बाल अधिकार आयोग ने विगत 26 मार्च को कलेक्टर रतलाम को पत्र लिखकर बालिका के पिता अमरसिंंह को आर्थिक,चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने और दोषी शिक्षिका के विरुद्ध कार्यवाही करने के लिए कहा गया है। लेकिन रतलाम कलेक्टर की ओर से अब तक इस पर कोई कार्यवाही नहीं की गई है। वाल कल्याण समिति के अध्यक्ष शंभू सिंह चौधरी का कहना है कि बाल कल्याण समिति अपने स्तर पर बालिका की मदद के लिए प्रयासरत है।