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Mandsaur News: प्रदेश की आधी से ज्यादा मिट्टी जांच लैब ठप, टेंडर हुए 5 महीने बीते

 

Mandsaur News: प्रदेश में किसानों को वैज्ञानिक खेती के लिए मृदा परीक्षण की सुविधा देने बनाई गई ब्लॉक स्तरीय मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं (सॉयल टेस्टिंग लैब) अब भी सरकारी फाइलों और आदेशों के इंतजार में अटकी हैं। इन्हें निजी संस्थाओं और उद्यमियों को सौंपने की प्रक्रिया अक्टूबर 2024 में शुरू हुई थी। दिसंबर में टेंडर भी खुले। लेकिन मई 2025 तक सिर्फ 26 जिलों के 151 ब्लॉकों की लैब ही हैंडओवर हो सकीं, वो भी आंशिक रूप से।

इनमें भी कई जगह अभी तक मशीनें इंस्टॉल नहीं हुई हैं। बाकी 29 जिलों के 114 ब्लॉकों में स्थित लैब अब भी सरकारी कब्जे में पड़ी हैं, जहां वर्षों से कोई काम नहीं हो रहा। ये वो लैब हैं, जो करोड़ों की लागत से बनीं, लेकिन न किसानों के काम आईं और न ही युवाओं के लिए रोजगार का जरिया बन सकीं। इन लैब में अब भी ताला लटका हुआ है। कुछ जिलों में पूरी तो कहीं एक भी लैब हैंडओवर नहींः कुछ जिले ऐसे भी रहे जहां जितने ब्लॉक में लैब बनी, वे सभी अब निजी संस्थाओं को सौंप दिए गए।

इन जिलों में धार के 12, बड़वानी के 7, बालाघाट के 9, सागर के 10, छतरपुर के 7 और अलीराजपुर के 3 ब्लॉकों में बनी सभी लैब्स हैंडओवर की जा चुकी हैं। इन जिलों में प्रक्रिया तेज रही। वहीं कुछ जिलों में हाल ऐसा है कि सिर्फ 1 या 2 ब्लॉकों की लैब ही हैंडओवर हो सकीं। कटनी और हरदा जैसे जिलों में सिर्फ 1-1 ब्लॉक की लैब ही निजी हाथों में जा सकी। गुना में 2, झाबुआ में 4 और आगर मालवा में भी सिर्फ 4 लैब्स का ट्रांसफर हुआ है। यहां प्रक्रिया काफी धीमी रही।

चंबल, रीवा और शहडोल संभाग में एक भी लैब आउटसोर्स नहीं
सबसे चिंताजनक तस्वीर उन संभागों की है जहां किसी भी जिले में एक भी ब्लॉक की लैब निजी संस्थाओं को नहीं सौंपी गई। इनमें चंबल, रीवा और शहडोल जैसे संभाग शामिल हैं। इनमें चंबल संभाग के मुरैना, श्योपुर और भिंड, शहडोल संभाग के अनूपपुर, शहडोल और उमरिया, रीवा संभाग के रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज और मैहर जिले शामिल हैं। वहीं भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, उज्जैन, अशोकनगर, दतिया, बुरहानपुर, नरसिंहपुर, डिंडोरी, पांढुर्णा, दमोह, टीकमगढ़, निवाड़ी, मंदसौर, नीमच, रतलाम और शाजापुर जिलों में भी एक भी लैब आउटसोर्स को हैंडओवर नहीं हुई है।


इन जिलों में सरकार ने थमाई चाबी, ताला खुलने का इंतजारः अब तक जिन जिलों में ब्लॉक स्तर पर बनी सॉयल टेस्टिंग लैब्स युवा उद्यमियों या कृषि से जुड़ी निजी संस्थाओं को सौंपी गई हैं, उनमें गुना के 2, सीहोर के 4, रायसेन के 6, विदिशा के 5, राजगढ़ के 5, बैतूल के 9, नर्मदापुरम के 6, हरदा के 1, आगर मालवा के 4,देवास के 5, धार के 12, खरगौन के 8, बड़वानी के 7, खंडवा के 6, झाबुआ के 4, अलीराजपुर के 3, बालाघाट के 9, छिंदवाड़ा के 6, जबलपुर के 6, सिवनी के 5, मंडला के 8, कटनी के 1, छतरपुर के 7, सागर के 10, पन्ना के 4 और शिवपुरी के 6 ब्लॉकों की लैब्स का आंशिक या पूर्ण हैंडओवर हो चुका है।

सरकार देरही 4500 सैंपल की गारंटी। मप्र देश का इकलौता ऐसा राज्य है जहां ब्लॉक लेवल तक मिट्टी जांच की सुविधा विकसित की है। पर कई लैब्स का नियमित संचालन शुरू नहीं हो पाया है। सरकार ने इन लैब्स को निजी संस्थाओं को सौंपने 3 बार टेंडर किए, किसी ने रुचि नहीं दिखाई। सरकार ने तय किया हर संचालक को वर्ष में कम से कम 4500 मिट्टी सेंपल जांचने का काम देंगे। किसान खुद सैंपल लाकर देगा, तो 235 रु. प्रति जांच और लैब संचालक खेत से खुद सेंपल लाता है, तो उसे सरकार 285 रु. प्रति जांच की दर से भुगतान करेगी। किसानों के लिए यह सेवा पहले की तरह निःशुल्क ही रहेगी।