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चरखारी नरेश जुझार सिंह से जुड़ा है बारीगढ़ का इतिहास

 

Chhatarpur News: जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर बारीगढ़ नगर का इतिहास काफी पुराना है। इसे चंदेल वंशी राजाओं ने बसाया था। नगर के आसपास पत्थर खदानों का बड़ा क्षेत्र है, जहां आज भी खदानें संचालित होती हैं। कभी यह गौरिहार जनपद का ब्लॉक हुआ करता था, लेकिन कुछ साल पहले इसका कार्यालय गौरिहार स्थानांतरित कर दिया गया।

आल्हा-ऊदल और किले की कहानी

स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, बारीगढ़ का पुराना नाम "बौरीगढ़" था। इसका उल्लेख आल्हा खंड में भी मिलता है। चरखारी के शासक रहे जुझार सिंह के समय नगर का नाम "जुझार नगर" पड़ा। आज भी यहां थाना और डाकघर जुझार नगर नाम से जाने जाते हैं। हालांकि आम बोलचाल में लोग इसे बारीगढ़ ही कहते हैं।

इतिहास के जानकार बताते हैं कि चंदेल राजाओं की राजधानी पहले खजुराहो से महोबा लाई गई थी। इसके बाद आल्हा-ऊदल ने बारीगढ़ में अपनी चौकी बनाई। नगर के बीच पहाड़ी पर "किला दहलान" का निर्माण कराया गया और पूरे नगर को पत्थरों की दीवार से घेरा गया। इस दीवार के अवशेष आज भी मौजूद हैं और नगर की पहचान बने हुए हैं।

प्राचीन मंदिर और धार्मिक महत्व

बारीगढ़ में पांच प्रमुख मंदिर हैं, जिनमें मां धंधागिरि मंदिर को पर्यटन स्थल घोषित किया गया है। यहां आसपास के क्षेत्र से लोग बड़ी संख्या में दर्शन के लिए आते हैं। नगर में बस स्टैंड और सीएम राइज स्कूल होने से लोगों को शिक्षा और आवागमन की सुविधा मिलती है। हालांकि जनपद मुख्यालय गौरिहार दूर होने से कई कामों के लिए 20 किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती है।

पंचायत का संक्षिप्त परिचय

जनसंख्या: लगभग 10,093

साक्षरता दर: 75%

मुख्यालय से दूरी: 70 किमी

कनेक्टिविटी: सागर–कानपुर हाईवे के पास

रेलवे स्टेशन: महोबा (उ.प्र.)

मुख्य उत्पादन: कृषि और व्यापार

दर्शनीय स्थल: धंधागिरि मंदिर

नगर में करीब नौ तालाब हैं, जिनमें साहब तालाब और बनिया तालाब प्रमुख हैं। दुर्भाग्य से संरक्षण न मिलने से यह तालाब धीरे-धीरे अपना स्वरूप खो रहे हैं। यदि समय रहते इनका संरक्षण हो तो नगर की खूबसूरती और भी निखर सकती है।