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नल-जल योजनाओं की हकीकत: टंकी बनी पर सप्लाई ठप, ग्रामीण फिर हैंडपंप पर निर्भर

 

Tikamgarh News: जल जीवन मिशन के तहत जिले में नल-जल योजनाओं को हर घर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है। जिले में कुल 486 योजनाएँ स्वीकृत हुईं, जिनमें से 215 पूरी हो चुकी हैं। इनमें 164 पंचायतों को सौंप दी गईं, लेकिन अधिकतर स्थानों पर सप्लाई सुचारू नहीं हो पाई। शेष योजनाएँ अधूरी पड़ी हैं, कहीं 30 तो कहीं 50 प्रतिशत काम ही हो पाया है। बरसात और तकनीकी कारणों को देरी की वजह बताया जा रहा है, जबकि कई प्रोजेक्ट वर्षों से रिवाइज के नाम पर अटके पड़े हैं।

धजरई: डेढ़ साल से बंद पड़ी सप्लाई

धजरई गांव में 1.25 लाख लीटर क्षमता की टंकी का निर्माण हुआ। यहाँ 462 घरों तक कनेक्शन और पिलर पर नल लगाए गए। शुरुआती दिनों में पानी मिला भी, लेकिन पिछले डेढ़ साल से सप्लाई बंद है। पाइपलाइन कई जगह से उखड़ गई और पिलर झाड़ियों में दब गए। नतीजतन लोग फिर से हैंडपंप और कुएं का सहारा ले रहे हैं। गांव में करीब 10 हैंडपंप हैं जिन पर सुबह से ही लंबी लाइन लग जाती है।

रामनगर: खराब मशीन से बंद हुई योजना

रामनगर में बनी टंकी भी अब शोपीस बनकर रह गई है। यहाँ बोरिंग से टंकी भरकर सप्लाई की जाती थी, लेकिन मशीन खराब होने के कारण पिछले दो माह से जलापूर्ति बंद है। करीब 200 घरों में लगे नल बेकार पड़े हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत सुधार कार्य में रुचि नहीं ले रही। योजना के संचालन के लिए नियुक्त ऑपरेटर को जनवरी से वेतन तक नहीं मिला, जिससे देखरेख और भी बिगड़ गई।

मोहनपुरा: टंकी बनी, पाइप बिछे, फिर भी पानी नहीं

मोहनपुरा गांव में टंकी और पाइपलाइन का निर्माण हो चुका है। 177 घरों को कनेक्शन देने के लिए चिह्नांकन भी किया गया। बोर में पर्याप्त पानी होने के बावजूद सप्लाई शुरू नहीं हुई। यहाँ योजना को रिवाइज कर संपवेल से पानी देने का प्रावधान किया गया था, लेकिन काम अधूरा ही रह गया। ग्रामीणों का कहना है कि टंकी बनने के बाद उम्मीद थी कि हैंडपंप से छुटकारा मिलेगा, मगर आज भी स्थिति जस की तस है।

लक्ष्य अधूरा, समस्या बरकरार

सरकार ने वर्ष 2025 तक हर घर में नल से पानी पहुंचाने का लक्ष्य तय किया था, लेकिन अभी आधा काम भी पूरा नहीं हुआ है। मौजूदा हालात देखकर साफ है कि समय पर लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा। ग्रामीणों का कहना है कि यदि अधूरी योजनाएँ समय पर पूरी कर दी जाएँ तो पानी की समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है।

विभाग का दावा

अधिकारियों का कहना है कि अधूरी परियोजनाओं को रिवाइज कर स्वीकृति दी गई है और इनका काम दोबारा शुरू करा दिया गया है। वहीं हैंडओवर की गई टंकियों का संचालन पंचायतें नहीं कर पा रहीं, इसलिए अब एजेंसी को जिम्मेदारी दी जाएगी। पंचायत स्तर पर जलापूर्ति बनाए रखने की दिशा में नई कार्यप्रणाली अपनाई जाएगी।