मां की अर्थी उठने से पहले वरिष्ठ शिक्षक बेटे की भी हो गई मौत, एक ही आंगन से निकली दो अर्थियां
अंबिकापुर,23 जुलाई (इ खबर टुडे ) । जिसे मां की अर्थी को कंधा देना था, उसी बेटे की अर्थी उसी दिन उसी आंगन से उठी। सूरजपुर जिले के रामानुजनगर विकासखंड के दौना गांव में बुधवार को यह हृदयविदारक घटना हुई, जिसने पूरे इलाके को गहरे शोक में डुबो दिया। कुछ ही घंटों के अंतराल में एक ही घर से मां और बेटे की दो अर्थियां एक साथ निकलीं तो हर आंख नम हो गई।
दौना निवासी रामधन साहू (52) प्राथमिक शाला दौना में प्रधान पाठक के पद पर पदस्थ थे। बुधवार सुबह करीब नौ बजे उनकी मां की अचानक तबीयत बिगड़ी। स्वजन अस्पताल ले जाने की तैयारी करते, इससे पहले ही उन्होंने घर पर अंतिम सांस ले ली। घर में मातम पसर गया और अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू हो गईं।
दोपहर में बारिश के बीच मां की अर्थी सज चुकी थी। स्वजन अंतिम विदाई की तैयारी में थे। तभी रामधन साहू ने अचानक सीने में तेज दर्द और घबराहट की शिकायत की। परिजन तुरंत उन्हें श्रीनगर अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। चिकित्सकों के अनुसार प्रारंभिक तौर पर मौत हार्ट अटैक से हुई।
जिस बेटे ने मां को अंतिम विदाई देने के लिए खुद को संभाल रखा था, उसकी भी अर्थी उसी दिन सज गई। मां और बेटे का अंतिम संस्कार एक ही दिन, पास-पास बनी अलग-अलग चिताओं पर किया गया।
दिव्यांगता को नहीं बनने दिया बाधा
रामधन साहू एक पैर से दिव्यांग थे, लेकिन उन्होंने कभी शारीरिक चुनौती को कर्तव्य के आड़े नहीं आने दिया। सादगी, ईमानदारी और बच्चों के प्रति समर्पण के लिए पहचाने जाते थे। पिछले वर्ष पदोन्नति के बाद सहायक शिक्षक से प्रधान पाठक बने थे और अपने ही गांव की स्कूल में सेवा दे रहे थे।
सहकर्मी शिक्षक ब्रह्मानंद दुबे ने बताया कि मां के निधन की खबर सुनकर वे रामधन से मिलने घर पहुंचे थे। तब वे सामान्य रूप से बातचीत कर रहे थे। तबीयत खराब होने का कोई संकेत नहीं था। किसी ने सोचा भी नहीं था कि कुछ ही देर में वे भी साथ छोड़ देंगे।