पहले था कचरे का पहाड़, आज बना खूबसूरत राप्ती ईको पार्क – गोरखपुर का यह बदलाव देखकर हर कोई हैरान
नई दिल्ली,3 अगस्त(इ खबर टुडे)। स्वच्छ भारत मिशन-अर्बन के अंतर्गत देशभर में लेगेसी वेस्ट डंपसाइट्स के वैज्ञानिक निस्तारण का व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। वर्षों से शहरों के बीच मौजूद कचरे के पहाड़ शहरी विकास में बड़ी बाधा बने हुए थे। इसी चुनौती को अवसर में बदलने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के सहयोग से नगर निकाय लगातार प्रयासरत हैं। इसी दिशा में गोरखपुर नगर निगम ने एक उल्लेखनीय पहल करते हुए वर्षों पुराने डंपसाइट का वैज्ञानिक निस्तारण कर उसे एक सुंदर और जीवंत सार्वजनिक स्थल – “राप्ती ईको पार्क” – के रूप में विकसित किया गया है। यह परिवर्तन केवल भूमि पुनरुद्धार की कहानी नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, सामुदायिक सहभागिता और सतत विकास की एक प्रेरक मिसाल भी है।
लगभग 40 एकड़ क्षेत्र में विकसित यह डंपसाइट सात वर्षों तक शहर के कचरे का प्रमुख निस्तारण स्थल रही। समय के साथ यहां लाखों टन कचरा जमा होता गया और यह क्षेत्र एक विशाल कचरे के पहाड़ में बदल गया। आसपास रहने वाले लोगों के लिए जीवन कठिन होता जा रहा था। दुर्गंध, धुआं, लीचेट का रिसाव, मच्छरों की बढ़ती संख्या और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं ने क्षेत्र की स्थिति को गंभीर बना दिया था। तेज हवा चलने पर कचरा उड़कर लोगों के घरों तक पहुंच जाता था और असहनीय बदबू के कारण लोगों का घरों में रहना मुश्किल हो जाता था। डंपसाइट का असर केवल स्थानीय निवासियों तक सीमित नहीं था। क्षेत्र की सड़कें मवेशियों से घिरी रहती थीं, बारिश के मौसम में दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता था। और पूरे इलाके की छवि प्रभावित हो रही थी। भूजल एवं मिट्टी प्रदूषण की आशंका लगातार बढ़ रही थी तथा वायु गुणवत्ता भी लगातार खराब हो रही थी।
इस जटिल समस्या के स्थायी समाधान के लिए नगर निगम ने डंपसाइट के वैज्ञानिक निस्तारण हेतु बायोमाइनिंग तकनीक को अपनाया। करीब 8 ट्रॉमल मशीनों, जेसीबी मशीनों और लगभग 25 कर्मियों की सहायता से प्रतिदिन लगभग 400 टन कचरे की प्रोसेसिंग शुरू की गई। वर्षों से जमा कचरे को वैज्ञानिक तरीके से अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया— रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल (RDF), काली मिट्टी (ब्लैक सॉइल), पुनर्चक्रण योग्य सामग्री, और इनर्ट सामग्री। निस्तारण प्रक्रिया से प्राप्त ब्लैक सॉइल का उपयोग निम्न-स्थलों की भराई में किया गया, जबकि RDF को अल्ट्राटेक सीमेंट उद्योग में प्रसंस्करण हेतु भेजा गया। इस प्रकार कचरे का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया गया और लैंडफिल पर निर्भरता कम हुई।
बायोमाइनिंग प्रक्रिया के माध्यम से 40 एकड़ भूमि को पुनः प्राप्त किया गया। इससे लेगेसी वेस्ट से होने वाले मीथेन उत्सर्जन में भी कमी आई। पहले जहां धातुएं और हानिकारक तत्व भूजल एवं मिट्टी को प्रभावित कर रहे थे, वहीं डंपसाइट के निस्तारण के बाद क्षेत्र की जल एवं वायु गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखा गया। भूमि पर वृक्षारोपण किया गया, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर हुई और ग्रीन एरिया विकसित होने लगा। आज यह क्षेत्र जैव विविधता के लिए भी एक अनुकूल वातावरण बन चुका है। यहां विभिन्न प्रकार की वनस्पतियां विकसित हुई हैं तथा मधुमक्खियों और तितलियों की प्रजातियों की संख्या में वृद्धि हुई है, जिससे स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिली है।
डंपसाइट के निस्तारण के बाद यह सुनिश्चित किया गया कि भूमि का पुनः उपयोग जनहित में हो और यहां दोबारा कचरा न डाला जाए। इसी सोच के साथ 40 एकड़ क्षेत्र में “कचरे से कंचन राप्ती ईको पार्क” विकसित किया गया। पार्क की सबसे खास बात यह है कि यहां स्थापित कई शिल्प और सजावटी संरचनाएं नगर निगम की कार्यशाला से निकले अपशिष्ट पदार्थों से तैयार की गई हैं। यह संदेश देती हैं कि अपशिष्ट भी संसाधन बन सकता है। पार्क में विकसित प्रमुख सुविधाओं में शामिल हैं— ग्रीन लॉन, वॉकिंग एवं जॉगिंग ट्रैक, बच्चों के लिए किड्स ज़ोन, ओपन जिम, योग एवं मेडिटेशन क्षेत्र, सेल्फी प्वाइंट, जल संरक्षण संरचनाएं, सोलर लाइटिंग, थीम आधारित उद्यान, आधुनिक बैठने की व्यवस्था, फूड कोर्ट एवं कियोस्क, पार्किंग और सार्वजनिक सुविधाएं आदि। यहां संचालित रेस्टोरेंट को महिला स्वयं सहायता समूह “शक्ति की रसोई” से जोड़ा गया है, जिससे स्थानीय महिलाओं को आजीविका के अवसर भी प्राप्त हुए हैं।
इस ईको पार्क के बनने का बाद प्रतिदिन लगभग 500 लोग यहां सुबह और शाम सैर, व्यायाम और मनोरंजन के लिए आते हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार अब क्षेत्र में स्वच्छ वातावरण उपलब्ध है, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में कमी आई है और जीवन पहले की तुलना में कहीं अधिक सुविधाजनक हो गया है। बच्चों के लिए खेल क्षेत्र, वरिष्ठ नागरिकों के लिए शांत वातावरण और परिवारों के लिए मनोरंजन की सुविधाओं ने इस स्थान को एक लोकप्रिय सार्वजनिक स्थल बना दिया है।
परियोजना का संचालन एवं रखरखाव नगर निगम गोरखपुर और स्वयं सहायता समूहों के सहयोग से किया जा रहा है। पार्क बनने के बाद आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों में भी वृद्धि हुई है। सड़क संपर्क बेहतर होने से स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिला है और भविष्य में रोजगार के नए अवसर विकसित होने की संभावनाएं भी बढ़ी हैं। यह परिवर्तन स्वच्छ भारत मिशन के उस व्यापक विज़न को साकार करता है, जिसमें लेगेसी वेस्ट से मुक्त, स्वच्छ, और सस्टेनेबल शहरों का निर्माण किया जा रहा है