सोयाबीन के भाव 5000 पार, किसान और स्टॉक वाले मालामाल
सोयाबीन सीजन का
अंतिम दौर चल रहा है। अब तक मंडियों में 90% सोयाबीन बिक चुका है। करीब 10 लाख बोरी की बिक्री हो चुकी है। इस बार किसानों और व्यापारियों ने जल्दी-जल्दी मुनाफा कमा लिया। भावांतर योजना के चलते किसानों को भाव में कोई
नुकसान नहीं हुआ।
सीजन की शुरुआत में गीला और सूखा सोयाबीन 4250 से 4300 रुपए प्रति क्विंटल बिका। अब वही सोयाबीन दो महीने में 400 रुपए प्रति क्विंटल का लाभदे रहा है। उधर, अमेरिका-चीन टैरिफ वार के चलते तेल के भाव में जबरदस्त तेजी आई है। सोयाबीन के भाव 5000 रुपए प्रति क्विंटल पार कर चुके हैं। स्टॉक करने वालों ने माल बेचकर लाखों रुपए का मुनाफा कमा लिया है। हालांकि यह तेजी स्थाई नहीं मानी जा रही। टैरिफ वार सुलझा तो सोयाबीन और तेल दोनों में भारी गिरावट आ सकती है। इसी वजह से किसान और व्यापारी जल्द से जल्द माल बेचकर लाभ ले रहे हैं। उज्जैन मंडी में रोजाना 3 करोड़ रुपए का सोयाबीन किसान बेचने ला रहे हैं। अंतिम दौर में भावांतर का लाभ भी मिल रहा है। मंडी में
किसानों को तुरंत भुगतान और समय पर तोल जरूरी है। अक्सर अधिक आक्क के समय छोटे व्यापारियों द्वारा दो-चार कट्टे की खरीदी होती है, लेकिन उनका तोल तुरंत नहीं हो पाता। जहां ज्यादा आवक होती है, वहां तोल लगातार चलता रहता है। मंडी प्रशासन तोल व्यवस्था में बदलाव की तैयारी में है। कोशिश है कि किसान की एक बोरी उपज भी तुरंत तोली जाए।
डिजिटल सिस्टम लागू होने से समस्या लगभग खत्म हो चुकी है। कभी-कभी अपवाद स्वरूप तोल में दिक्कत आ जाती है। मंडी प्रशासन इसे सुधारने की दिशा में काम कर रहा है। आने वाले दिनों में मंडी में बड़े बदलाव की संभावना है। सिस्टम को तेज करने के लिए नए अधिकारी की नियुक्ति की गई है। अब देखना है कि मंडी में कितना सुधार होता है।