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  शून्य से शिखर तक का सफर / "हुनर है तो कद्र है" महिला यदि ठान ले, तो वह परिवार का नाम रोशन कर सकती है : ​गायत्री ज्ञानेश्वर सोनी

 
 

रतलाम / ग्रहणी महिला गायत्री सोनी ने अपने ज्ञान कौशल और समझ से परिवार ही नहीं अपितु अपने अंदर विराजित प्रतिभा से आज शहर में नाम रोशन किया है। सिलाई, कुकिंग, आर्ट क्लासेस के साथ ही लघु उद्योग को पूरी निष्ठां और सेवा भाव से पूर्व किया। उनके द्वारा बनाये अचार शहर के साथ ही अन्य प्रदेशो में धूम मचा रहे है। 

शैक्षणिक नीव और पारिवारिक जीवन
​गायत्री सोनी ने अपनी शिक्षा को बहुत महत्व दिया और होम साइंस (Home Science) विषय के साथ हायर सेकेंडरी परीक्षा प्रथम श्रेणी (1st Class) में उत्तीर्ण की। शिक्षा के प्रति उनका यह लगाव ही आगे चलकर उनके कौशल की पहचान बना। 1988 में उनका विवाह हुआ, जहाँ उन्हें अपने पति का निरंतर सहयोग प्राप्त हुआ।

हुनर का विकास और सामाजिक सरोकार
​विवाह के बाद गायत्री जी ने घर की जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपने भीतर छिपे हुनर को निखारा। उन्होंने ​सिलाई, कुकिंग, बेकिंग और आर्ट क्लासेस में विशेषज्ञता हासिल की। 

​नि:स्वार्थ सेवा: उन्होंने अपना यह ज्ञान केवल खुद तक सीमित नहीं रखा, बल्कि समाज की जरूरतमंद महिलाओं को मुफ्त में ट्रेनिंग दी ताकि वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें।

पेशेवर पहचान और सरकारी संस्थानों से जुड़ाव
​गायत्री जी की कार्यकुशलता ने उन्हें बड़े मंचों तक पहुँचाया। वे MSME और CEDMAP (सेंटर फॉर एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट मध्य प्रदेश) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़ीं:

​मंदसौर: CEDMAP के माध्यम से यहाँ उन्होंने आंवला प्लांट डलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

​इंदौर: उन्होंने जिला जेल इंदौर में कैदियों को प्रशिक्षण देकर उन्हें सुधार और स्वरोजगार की राह दिखाई। ​शैक्षणिक संस्थानों में योगदान: रतलाम के कन्या विद्यालय व लॉ कॉलेज, जावरा के भगत सिंह शासकीय कॉलेज और सैलाना के शासकीय महाविद्यालय में उन्होंने ट्रेनिंग और सम्मान प्राप्त किया। ​उन्होंने नीमच और उज्जैन जैसे शहरों में भी अपनी सेवाएँ दीं।

आपदा में अवसर: 'लघु अचार उद्योग' की शुरुआत
​कोरोना काल की चुनौतियों के दौरान उन्होंने हार नहीं मानी और घर से अचार बनाने का कार्य शुरू किया। प्रधानमंत्री जी की 'वन स्टेशन वन प्रोडक्ट' (OSOP) योजना उनके लिए मील का पत्थर साबित हुई। ​उन्होंने रतलाम रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 4 पर अपना स्टॉल लगाया। ​आज वे अपने घर में अपनी दो बहुओं के साथ मिलकर इस लघु उद्योग को पूरी मेहनत से चला रही हैं। ​इस उद्यम के माध्यम से उन्होंने कई अन्य महिलाओं को भी रोजगार प्रदान किया है।

देशव्यापी विस्तार और सफलता
​आज गायत्री जी के हाथों के स्वाद का जादू केवल रतलाम तक सीमित नहीं है। उनके द्वारा बनाए गए 'स्पेशली अचार' की मांग आज देश के विभिन्न कोनों में है। दिल्ली, पंजाब, महाराष्ट्र और चेन्नई जैसे राज्यों में उनके अचार का स्वाद पहुँच चुका है।

निष्कर्ष: गायत्री ज्ञानेश्वर जी सोनी का जीवन मंत्र रहा है— "हुनर है तो कद्र है"। उन्होंने यह साबित कर दिखाया कि एक महिला यदि ठान ले, तो वह न केवल अपने परिवार का नाम रोशन कर सकती है, बल्कि समाज की सैकड़ों महिलाओं के जीवन में भी उजाला ला सकती है।