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भारत में बढ़ेगा बादाम आयात , घरेलू उत्पादन कम, भाव में आएगी तेजी

 

घरेलू उत्पादन घटने से इसकी पूर्ति आयात पर निर्भर हो गई है। अमरीकी कृषि विभाग की विशेष कृषि सेवा (यूएसडीए पोस्ट) के भारतीय प्रतिनिधि कार्यालय ने अपनी रिपोर्ट में अनुमान जताया है कि 2024-25 में भारत का बादाम आयात 1.84 लाख टन से बढ़कर 1.90 लाख टन तक पहुंच जाएगा। यानी करीब 3 प्रतिशत या 6 हजार टन की वृद्धि होगी। रिपोर्ट के मुताबिक जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश, जहां भारत का अधिकतर बादाम उत्पादन होता है, वहां मौसम का रुख इस बार फसल के लिए अनुकूल नहीं रहा। यही वजह है कि कुल उत्पादन 4150 टन से घटकर 4100 टन पर सिमटने की संभावना जताई गई है।

यूएसडीए पोस्ट की रिपोर्ट यह भी बताती है कि बादाम उत्पादकों के लिए कोई केंद्रीकृत मंडी व्यवस्था नहीं है। इस वजह से उन्हें उचित मूल्य नहीं मिल पाता और उत्पादन बढ़ाने का प्रोत्साहन भी घट गया है। नतीजा यह है कि घरेलू उत्पादन साल-दर-साल गिरावट के रास्ते पर है। दूसरी ओर मांग का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है। 2023-24 में भारत में बादाम की खपत 1.84 लाख टन रही, जो 2024-25 में बढ़कर 1.86 लाख टन होने का अनुमान है। 2025-26 में यह आंकड़ा 1.95 लाख टन तक पहुंच सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बादाम को "सुपर फूड" की श्रेणी में गिना जाता है। बढ़ती आय और स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता के चलते भारतीय उपभोक्ताओं में बादाम सहित अन्य ड्राईफ्रूट्स की मांग लगातार बढ़ रही है। आने वाले दिनों में त्योहारी सीजन इस मांग को और तेज कर देगा।

स्थानीय बाजार की बात करें

तो सियागंज थोक किराना बाजार में फिलहाल बादाम 790 से 840 रुपए प्रति किलो बिक रहा है। उधर, दशहरा और दिवाली नजदीक आने के कारण प्रीमियम क्वालिटी खोपरा बूरा व्हील में भी अच्छी ग्राहकी देखी जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि त्यौहारों से पहले सूखे मेवों की डिमांड और ज्यादा बढ़ सकती है। कुल मिलाकर स्थिति यह है कि भारत में बादाम का उत्पादन लगातार दबाव में है, जबकि खपत और आयात बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उत्पादकों को बेहतर मूल्य, नई बागवानी तकनीक और मौसम अनुकूलन उपायों का लाभनहीं मिला तो आने वाले समय में आयात पर निर्भरता और ज्यादा बढ़ जाएगी।