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वर्तमान में महावीर के विचारों की उपादेयता

महावीर जयन्ती पर विशेष

-प्रो.डॉ.एसी जैन (सावला)

आज के प्रसंग में महावीर के विचारों को देखें तो उनके विचार आज की सभी समस्याओं के निदान की दृष्टि से सौ टका कसौटी पर खरे उतरते है। वर्तमान में दुनिया की सबसे बडी समस्या ममत्व है,जिसमें लालसा,गलाकाट प्रतिस्पर्धा,स्वार्थ,ईष्र्या,द्वेष,क्रोध,हिंसा,काम आदि मनोभाव समाहित है। इसी से आज का मनुष्य अपने भीतर और बाहर चलने वाले युध्द से संघर्षरत है। बाहर के युध्द को विनाशकारी हथियारों से लडकर,नरसंहार कर,समूल सृष्टि को नष्ट करने के प्रयास हो रहे है। लेकिन मनुष्य के अंदर जो अपने आप से युध्द चल रहा है,वह तो सबसे अधिक घातक है। अपने भीतर की लडाई से कैसे लडा जाए,इसका निदान महावीर के विचारों में है। वस्तुत: मनुष्य की अपने आप से लडाई सबसे ज्यादा त्रासद है। यह एक ऐसा बीज है ,जो मनुष्य द्वारा बाहर लडे जाने वाले युध्द को उत्पन्न करता है,इसका मूल ममत्व है। यह ममत्व ही पूरी दुनिया में फैले तनाव का कारण है। ममत्व के इस तनाव से आदमी को नागपाश की तरह पूरी तरह जकड लिया है। तनाव एक खतरनाक मानसिक प्रदूषण है,कैंसर जैसी भंयकर बीमारी है। इस मर्ज की दवा महावीर के विचार समत्व और अपनत्व के भावों में है। महावीर का विशाल दृष्टिकोण,सत्यग्रहिता और निरपेक्ष नजर जो महावीर में जगी,मनुष्य जाति की महानतम उपलब्धि है। महावीर सुन्दरम के उपासक है।महावीर के विचारों का सार है,अपने लिए जीना छोडकर दूसरों के लिए जीना ही सार्थक है। जीवन की सुन्दरता महावीर के विचार-जियो और जीने दो में है। इन्ही विचारों से दुखों से मुक्ति मिल सकती है-

दुख से मुक्त होना,
गंध से मुक्त होना है,
गंध जो होने को अर्थ देता है,
वर्धमान को महावीर बनाता है।
देह के जाने का बाद भी,
जो बची रहती है,
वही है हमारी गंध,
वही है हमारा अर्थ,
जो जनमता है दुख से।

 

-प्रो.डॉ.एसी जैन (सावला)
12,समता डुप्लेक्स महू रोड,
रतलाम।

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