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Category Archives: आलेख

जरुरत क्या है दीवाली मनाने की…….?

-तुषार कोठारी

होली मत जलाईए,क्योंकि इससे धुंआ निकलता है जिससे पर्यावरण को खतरा है और प्रदूषण फैलता है। दीये जलाना भी प्रदूषण को बढाना ही है। दीपावली पर दीये जलाना तो बेहद पुरानी प्रथा है,आज के युग में दीये जलाने की क्या जरुरत है? बिना दीयों के भी खुशी मनाई जा सकती है। घरों पर रोशनी करना भी बिजली का अपव्यय है। वैसे भी उर्जा का अपव्यय गलत बात है। देश में डायबिटीज के रोगियों की तादाद बढती जा रही है। शक्कर का जितना कम उपयोग करेंगे उतना ही अच्छा होगा। दीवाली पर मिठाईयों की क्या जरुरत है?

पन्द्रह हजार फीट पर स्थित सतोपन्त झील पर गूंजे नमस्ते सदा वत्सले के स्वर

सतोपंत स्वर्गारोहिणी यात्रा- धर्मलाभ के साथ पर्वतारोहण का मजा

यात्रा वृत्तान्त-तुषार कोठारी

धार्मिक यात्रा और पर्वतारोहण या ट्रैकिंग दो सर्वथा भिन्न बातें है। धार्मिक यात्रा,व्यक्ति श्रध्दा के वशीभूत होकर धर्मलाभ अर्जित करने के लिए करता है,जबकि पर्वतारोहण या ट्रैकिंग एक साहसिक गतिविघि है,जिसे अपनी शारीरिक और मानसिक क्षमता जांचने के लिए किया जाता है। आमतौर पर दोनो बातें एक साथ नहीं होती। लेकिन यदि इन दोनो का ही मजा एकसाथ लेना हो तो निस्संदेह रुप से सतोपंत स्वर्गारोहिणी की यात्रा करना होगी। जिस रास्ते से पाण्डवों ने सशरीर स्वर्ग जाने की योजना बनाई थी और जिससे केवल युधिष्ठिर ही सशरीर स्वर्ग जा पाए थे,उसी स्वर्गारोहिणी की यात्रा आपको धार्मिक आध्यात्मिक अनुभव तो देती ही है,पर्वतारोहण की साहसिकता भी इसमें शामिल होती है।

संतो की साधना में बाधक बन रही है नर्मदा संरक्षण की वर्तमान व्यवस्था,बदलाव आवश्यक

-प्रभाकर केलकर

यह सर्वविदित है कि मां नर्मदा भारत की प्राचीन और पवित्र नदी है,जिसे रेवा माई के नाम से भी जाना जाता है। नर्मदा जी भारत वर्ष की गोदावरी और कृष्णा नदी के बाद तीसरी सबसे लम्बी नदी है। मां नर्मदा को मध्यप्रदेश की जीवनदायिनी अर्थात जीवनरेखा भी कहा जाता है। मैंकल(विन्ध्य) पर्वत अमरकंटक के शिखर से उदगमित होकर पश्चिम की दिशा में बहने वाली एकमात्र ऐसी नदी है जिसकी परिक्रमा की परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही है। 1310 कि.मी. लंबी नर्मदा नदी मध्यप्रदेश और गुजरात राज्य की प्रमुख नदी है और उत्तर और दक्षिण भारत के बीच एक पारंपरिक सीमा की तरह कार्य करती है। नर्मदा जी के दोनो ओर के तटों पर अमरकंटक सहित नेमावर,औंकारेश्वर,गुरुकृपा आश्रम झीकोली,शुक्ल तीर्थ आदि कई प्रसिध्द तीर्थस्थल है।

बिहार घटनाक्रम-लौट के बुध्दु घर को आए

-तुषार कोठारी

बिहार का घटनाक्रम और नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा इसे अगर एक वाक्य में कहा जाए तो यही कहा जा सकता है कि लौट के बुध्दू घर को आए। कहावतें अनुभवों के आधार पर ही बनीं है। बिहार का राजनीतिक घटनाक्रम इस कहावत को पूरी तरह सही साबित करता है।
नीतीश कुमार की राजनीति का विश्लेषण करने से साफ हो जाता है कि बिहार विधानसभा चुनाव में जैसे तैसे जीत कर मुख्यमंत्री का पद हासिल करने के बाद जल्दी ही यह बात उनके ध्यान में आ गई थी कि लालू से गठबन्धन करके वे बहुत बडी गलती कर बैठे है। वे लगातार इस गलती को सुधारने का मौका तलाश रहे थे और इसकी पृष्ठभूमि भी तैयार करने में लगे हुए थे।

चन्द्रशेखर जीवन भर आजाद रहे और आजाद रहकर मृत्यु को वरन कर शहीद हो गए

लेखक – श्यामलाल बोराना

क्रांतिकारी शब्द में ही व्यवस्था परिवर्तन एवं क्रांति के व्यक्तित्व की गाथा छिपी हुई होती हैं। इस व्यवस्था परिवर्तन के लिये क्रांतिकारियों ने अपना जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया एवं अपना नाम भारतीय इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठों में अंकित करवा लिया। देश की आजादी के लिये प्रथम प्रयास सन् 1857 की क्रांति के द्वारा हुआ था परन्तु इस समय अंग्रेजों ने क्रांति को दबा दिया था। उसके बाद सन् 1885 में कांग्रेस की स्थापना हुई थी इसी स्थापना अंग्रेज ए.ओ.ह्मूम ने की थी। अंग्रेजों ने अपने हित के लिये तथा भारतीयों के असंतोष को कम करने के लिये की थी।

पं.नेहरु की नासमझी का कष्ट भुगत रहे हैं भारत,तिब्बत और भूटान

(सन्दर्भ-डोकलाम सीमा विवाद)

– तुषार कोठारी

वर्तमान में डोकलाम के चीनी भारत सीमा विवाद को शायराना अंदाज में कुछ यूं कहा जा सकता है कि लम्हो ने खता की,सदियों ने सजा पाई। यह देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरु की नासमझी थी,जिसका कष्ट आज तक भारत,तिब्बत और भूटान भुगत रहे हैं। पं. नेहरु की नासमझी इतनी अधिक थी कि इसे सरासर मूर्खता भी कहा जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति को यह बता दिया जाए कि दीवार पर सिर मारने से उसका सिर फूट जाएगा और वह घायल हो जाएगा। यह स्पष्ट तौर पर समझाने के बावजूद यदि कोई व्यक्ति दीवार पर अपना सिर मार कर घायल होता है,तो उसे नासमझ कहेंगे या मूर्ख और पागल….? यदि स्नेह अधिक हो,तो ऐसे व्यक्ति को नासमझ कह लिया जाएगा,वरना तो ऐसा कृत्य मूर्खता या पागलपन की श्रेणी में ही आता है।

स्मृति शेष- स्व. अनिल माधव दवे

– शिवराज सिंह चौहान

भरोसा नहीं होता है कि अनिल दवे जी अब हमारे बीच नहीं हैं। अदभुत व्‍यक्तित्‍व के धनी, नदी संरक्षक, पर्यावरणविद, मौलिक चिंतक, कुशल संगठक थे। अनिल जी मौलिक लेखक थे। वे कल्‍पनाशील मस्तिष्‍क के धनी थे। उन्‍होंने अनेकों किताबें लिखीं। वे असाधारण रणनीतिकार थे। बचपन से जीवन भारत माता के चरणों में समर्पित कर दिया। उन्‍होंने राष्‍ट्रीय स्‍वयं सेवक संघ के प्रचारक के नाते पूरा जीवन, देश और समाज की सेवा में समर्पित कर दिया।

बूचडखानों पर रोक,मांसाहार,बीफ और शराब बन्दी का कम्फ्यूजन

  • तुषार कोठारी

जब से देश की केन्द्रीय सत्ता में और अनेक प्रदेशों में भाजपा बहुमत में आई है,भारतीय परंपरा और संस्कृति से अनजान अंग्रेजीदां बुध्दिजीवियों और मीडीया वालों के लिए कई सारे नए कन्फ्यूजन खडे हो गए है। कभी ये भ्रम परंपरा और संस्कृति को नहीं समझ पाने की वजह से होते है तो कभी भाषा की पर्याप्त समझ नहीं होने की वजह से। मजेदार बात यह है कि इस तरह भ्रमित हुए बुध्दिजीवी और मीडीया वाले अपने भ्रम को ही सत्य की तरह प्रस्तुत करते है,तो उनके ग्लैमर के असर में कई सारे लोग इसी को सच भी मानने लगते है।

डॉ.आम्बेडकर की स्पष्टवादिता

(डॉ.आम्बेडकर जयन्ती पर विशेष)

-डॉ.डीएन पचौरी

महापुरुष अपने देश की महान सेवा करते है,लेकिन निश्चय ही किसी न किसी समय वह अपने देश की प्रगति में बहुत बडी बाधा भी बन जाते है। मिस्टर गांधी इस देश के लिए सचमुच खतरा बन गए थे। उन्होने सारे विचारों को अवरुध्द कर दिया था।  क्या आप बता सकते है कि ये किसके विचार हो सकते है? ये विचार डॉ.आम्बेडकर ने गांधी जी के निधन के पश्चात व्यक्त किए थे। ये कटुसत्य और यथार्थ के निकट है। डॉ आम्बेडकर स्पष्टवादी थे। वे निडर,निर्भीक और नि:संकोच अपनी बात कहते थे।

वर्तमान में महावीर के विचारों की उपादेयता

महावीर जयन्ती पर विशेष

-प्रो.डॉ.एसी जैन (सावला)

आज के प्रसंग में महावीर के विचारों को देखें तो उनके विचार आज की सभी समस्याओं के निदान की दृष्टि से सौ टका कसौटी पर खरे उतरते है। वर्तमान में दुनिया की सबसे बडी समस्या ममत्व है,जिसमें लालसा,गलाकाट प्रतिस्पर्धा,स्वार्थ,ईष्र्या,द्वेष,क्रोध,हिंसा,काम आदि मनोभाव समाहित है। इसी से आज का मनुष्य अपने भीतर और बाहर चलने वाले युध्द से संघर्षरत है। बाहर के युध्द को विनाशकारी हथियारों से लडकर,नरसंहार कर,समूल सृष्टि को नष्ट करने के प्रयास हो रहे है।

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