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Category Archives: आलेख

चन्द्रशेखर जीवन भर आजाद रहे और आजाद रहकर मृत्यु को वरन कर शहीद हो गए

लेखक – श्यामलाल बोराना

क्रांतिकारी शब्द में ही व्यवस्था परिवर्तन एवं क्रांति के व्यक्तित्व की गाथा छिपी हुई होती हैं। इस व्यवस्था परिवर्तन के लिये क्रांतिकारियों ने अपना जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया एवं अपना नाम भारतीय इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठों में अंकित करवा लिया। देश की आजादी के लिये प्रथम प्रयास सन् 1857 की क्रांति के द्वारा हुआ था परन्तु इस समय अंग्रेजों ने क्रांति को दबा दिया था। उसके बाद सन् 1885 में कांग्रेस की स्थापना हुई थी इसी स्थापना अंग्रेज ए.ओ.ह्मूम ने की थी। अंग्रेजों ने अपने हित के लिये तथा भारतीयों के असंतोष को कम करने के लिये की थी।

पं.नेहरु की नासमझी का कष्ट भुगत रहे हैं भारत,तिब्बत और भूटान

(सन्दर्भ-डोकलाम सीमा विवाद)

– तुषार कोठारी

वर्तमान में डोकलाम के चीनी भारत सीमा विवाद को शायराना अंदाज में कुछ यूं कहा जा सकता है कि लम्हो ने खता की,सदियों ने सजा पाई। यह देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरु की नासमझी थी,जिसका कष्ट आज तक भारत,तिब्बत और भूटान भुगत रहे हैं। पं. नेहरु की नासमझी इतनी अधिक थी कि इसे सरासर मूर्खता भी कहा जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति को यह बता दिया जाए कि दीवार पर सिर मारने से उसका सिर फूट जाएगा और वह घायल हो जाएगा। यह स्पष्ट तौर पर समझाने के बावजूद यदि कोई व्यक्ति दीवार पर अपना सिर मार कर घायल होता है,तो उसे नासमझ कहेंगे या मूर्ख और पागल….? यदि स्नेह अधिक हो,तो ऐसे व्यक्ति को नासमझ कह लिया जाएगा,वरना तो ऐसा कृत्य मूर्खता या पागलपन की श्रेणी में ही आता है।

स्मृति शेष- स्व. अनिल माधव दवे

– शिवराज सिंह चौहान

भरोसा नहीं होता है कि अनिल दवे जी अब हमारे बीच नहीं हैं। अदभुत व्‍यक्तित्‍व के धनी, नदी संरक्षक, पर्यावरणविद, मौलिक चिंतक, कुशल संगठक थे। अनिल जी मौलिक लेखक थे। वे कल्‍पनाशील मस्तिष्‍क के धनी थे। उन्‍होंने अनेकों किताबें लिखीं। वे असाधारण रणनीतिकार थे। बचपन से जीवन भारत माता के चरणों में समर्पित कर दिया। उन्‍होंने राष्‍ट्रीय स्‍वयं सेवक संघ के प्रचारक के नाते पूरा जीवन, देश और समाज की सेवा में समर्पित कर दिया।

बूचडखानों पर रोक,मांसाहार,बीफ और शराब बन्दी का कम्फ्यूजन

  • तुषार कोठारी

जब से देश की केन्द्रीय सत्ता में और अनेक प्रदेशों में भाजपा बहुमत में आई है,भारतीय परंपरा और संस्कृति से अनजान अंग्रेजीदां बुध्दिजीवियों और मीडीया वालों के लिए कई सारे नए कन्फ्यूजन खडे हो गए है। कभी ये भ्रम परंपरा और संस्कृति को नहीं समझ पाने की वजह से होते है तो कभी भाषा की पर्याप्त समझ नहीं होने की वजह से। मजेदार बात यह है कि इस तरह भ्रमित हुए बुध्दिजीवी और मीडीया वाले अपने भ्रम को ही सत्य की तरह प्रस्तुत करते है,तो उनके ग्लैमर के असर में कई सारे लोग इसी को सच भी मानने लगते है।

डॉ.आम्बेडकर की स्पष्टवादिता

(डॉ.आम्बेडकर जयन्ती पर विशेष)

-डॉ.डीएन पचौरी

महापुरुष अपने देश की महान सेवा करते है,लेकिन निश्चय ही किसी न किसी समय वह अपने देश की प्रगति में बहुत बडी बाधा भी बन जाते है। मिस्टर गांधी इस देश के लिए सचमुच खतरा बन गए थे। उन्होने सारे विचारों को अवरुध्द कर दिया था।  क्या आप बता सकते है कि ये किसके विचार हो सकते है? ये विचार डॉ.आम्बेडकर ने गांधी जी के निधन के पश्चात व्यक्त किए थे। ये कटुसत्य और यथार्थ के निकट है। डॉ आम्बेडकर स्पष्टवादी थे। वे निडर,निर्भीक और नि:संकोच अपनी बात कहते थे।

वर्तमान में महावीर के विचारों की उपादेयता

महावीर जयन्ती पर विशेष

-प्रो.डॉ.एसी जैन (सावला)

आज के प्रसंग में महावीर के विचारों को देखें तो उनके विचार आज की सभी समस्याओं के निदान की दृष्टि से सौ टका कसौटी पर खरे उतरते है। वर्तमान में दुनिया की सबसे बडी समस्या ममत्व है,जिसमें लालसा,गलाकाट प्रतिस्पर्धा,स्वार्थ,ईष्र्या,द्वेष,क्रोध,हिंसा,काम आदि मनोभाव समाहित है। इसी से आज का मनुष्य अपने भीतर और बाहर चलने वाले युध्द से संघर्षरत है। बाहर के युध्द को विनाशकारी हथियारों से लडकर,नरसंहार कर,समूल सृष्टि को नष्ट करने के प्रयास हो रहे है।

प्रशासनिक कार्यप्रणाली में मौलिक परिवर्तन से ही बदलेगी देश की तस्वीर

-तुषार कोठारी

देश की स्वतंत्रता के बाद बनी लोकतांत्रिक सरकारों में से प्रत्येक सरकार ने देश के गरीब और पिछडे वर्गों की बेहतरी के लिए तमाम योजनाएं बनाई और लागू की। सात दशकों के इस लम्बे कालखण्ड में बनाई गई तमाम योजनाएं इतनी आकर्षक प्रतीत होती थी,कि लगता था कि इनके लागू होने के बाद समस्या जड से समाप्त हो जाएगी। लेकिन ये योजनाएं जब क्रियान्वयन के स्तर पर पंहुची तो पता चला कि योजनाओं का असर दस प्रतिशत भी नहीं हुआ। परिणाम यह है कि सत्तर साल पहले देश में जो समस्याएं थी,कमोबेश वही समस्याएं आज भी मुंह बाए खडी है।

भाजपा की प्रचण्ड जीत-हिन्दुत्व की ओर बढती देश की राजनीति

-तुषार कोठारी

उत्तर प्रदेश और उत्तरांचल में भाजपा को मिली प्रचण्ड जीत का विश्लेषण हर कोई अपने अपने ढंग से कर रहा है। कई लोग मोदी लहर को राम लहर से बडी भी बता रहे हैं। इसे विकास के नारे की जीत भी माना जा रहा है। इन विश्लेषणों से भी आगे अगर उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के नतीजों को साथ रख कर देखा जाए तो पता चलता है कि देश की राजनीति की दिशा बदल रही है। देश की राजनीति अब अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण से हिन्दुत्व की दिशा में बढने लगी है।

नई परिभाषायें बनाने वाला व्यक्तित्व शिवराज सिंह चौहान

मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के जन्मदिवस पर विशेष

.अजय वर्मा

व्यक्ति का व्यक्तित्वए उसके विचारए व्यवहार और व्यवसाय पर आधारित होता हैद्य कहा जाता हैए व्यक्ति जैसा सोचता है। धीरे.धीरे वह वैसा ही हो जाता है। व्यक्तित्व का निर्माण व्यवसायिक प्रतिबद्धताओं से भी होता है। देश काल परिस्थितियाँ व्यवहार के निर्धारक होते हैं। सामाजिक जीवन में सक्रिय कार्यकर्ता का व्यक्तित्व कार्य और व्यवहार से बनता है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के व्यक्तित्व की उदारताए सहृदयताए संवेदनशीलता और सज्जनता के अद्भुत संयोजन से ऐसा व्यक्तित्व निर्मित हुआ हैए जिसने राजनेताए प्रशासकए संगठक और कार्यकर्ता की सभी भूमिकाओं में सरलए सहजए उदारए स्नेही व्यक्तित्व की नई परिभाषाएं बनाई हैं।

नर्मदा और सहायक नदियाँ प्रदेश में स्‍थाई परिवर्तन की संवाहक बनी- दुर्गेश रायकवार

नर्मदा और उसकी सहायक नदियों में उपलब्धल जल राशि का विकास में उपयोग करने के लिये पिछले 11 वर्षों में जो योजनाबद्ध प्रयास हुए उनसे नर्मदा और उसकी सहायक नदियाँ मध्य प्रदेश के एक बडे भू.भाग में स्थाेई परिवर्तन की संवाहक बनी है। उल्लेखनीय है कि मध्‍यप्रदेश की जीवन.रेखा नर्मदा प्रदेश के अनुपपूर जिले में अमरकण्टयक पर्वत माला से निकलकर मध्य प्रदेश की सीमा तक 1077 किलोमीटर प्रवाहित होती है। प्रदेश के 16 जिले इसके प्रवाह क्षेत्र में आते हैं। मध्य प्रदेश में अपनी यात्रा में 39 प्रमुख सहायक नदियाँ नर्मदा से मिलती हैं।

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